मऊगंज के नईगढ़ी तहसील के ग्राम भीर में शासकीय भूमि आराजी नंबर 193 को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद गहरा गया है। मंगलवार दोपहर जनपद उपाध्यक्ष जुल्फीलाल साकेत के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक ग्रामीण कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर संजय कुमार जैन को ज्ञापन सौंपकर अपने वैधानिक अधिकारों की बहाली और न्याय की मांग की। ग्राम भीर स्थित आराजी नंबर 193 का कुल रकबा लगभग 168 एकड़ 31 डिसमिल है। यह भूमि वर्षों पहले मध्य प्रदेश शासन द्वारा पात्र ग्रामीणों को पट्टे के रूप में वितरित की गई थी। नियमानुसार, इन पट्टों को बाद में उपखंडों में विभाजित कर संबंधित लोगों को भू-स्वामी अधिकार दिए जाने थे। हालांकि, नक्शा तरमीम (मानचित्र संशोधन) में हुई गंभीर त्रुटियों के कारण यह प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो सकी है। इस मामले में अपर कलेक्टर इला तिवारी के न्यायालय ने पूर्व में गलत नक्शा तरमीम को निरस्त कर दिया था। उन्होंने तहसीलदार को समिति गठित कर मौके की स्थिति के अनुसार नए सिरे से सीमांकन और तरमीम करने के निर्देश दिए थे। राजस्व अमले ने इन आदेशों का पालन नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों भू-स्वामी अपनी जमीन पर न तो निर्माण कर पा रहे हैं और न ही उसका वैधानिक लेन-देन कर पा रहे हैं। प्रशासन की इस लापरवाही से ग्रामीणों को वर्षों से मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पत्रकारों से चर्चा करते हुए जुल्फीलाल साकेत ने कहा कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि आराजी नंबर 193 के सभी उपखंडों का तत्काल सीमांकन व तरमीम कराकर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि इस जटिल भूमि विवाद का स्थायी समाधान हो सके।


