भगवान भास्कर (सूर्य) की आराधना का पर्व मकर संक्रांति इस साल दो दिन मनाया जा रहा है। पारंपरिक मान्यता के चलते बुधवार (14 जनवरी) को भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सेठानी घाट और विवेकानंद घाट समेत सभी घाटों पर पहुंचकर नर्मदा स्नान किया और पूजन-पाठ किया। हालांकि, धर्मशास्त्रों के अनुसार पर्व का मुख्य पुण्यकाल 15 जनवरी (गुरुवार) को रहेगा। रात 9.29 बजे से शुरू होगी संक्रांति बुधवार को मकर संक्रांति 14 जनवरी की रात 9.29 मिनट से शुरू होगी, जो 15 जनवरी की दोपहर 1.29 मिनट तक रहेगी। आचार्य पंडित सोमेश परसाई ने बताया कि मकर संक्रांति पर्व का पुण्य और फल 15 जनवरी का स्नान करने और दान करने से ज्यादा मिलेगा। सूर्य के मकर राशि में आने से बढ़ा महत्व आचार्य ने बताया कि मकर संक्रांति पर सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में आते हैं। इसलिए इस उत्सव को मकर संक्रांति उत्सव कहा जाता है। सालों से 14 जनवरी को महापर्व मनाते हुए स्नान, दान और देव पूजन किया जाता रहा है, इसी मान्यता के चलते कुछ लोग आज भी संक्रांति मना रहे हैं। शुरू होंगे शुभ काम, गर्मी भी बढ़ेगी इस दिन से गर्मी भी तिल के समान बढ़ने लगती है। सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जिससे शुभ काम होने लगते हैं। पंडित परसाई के अनुसार, इस बार षटतिला एकादशी भी 14 जनवरी को रहेगी। इसलिए दो दिन उत्सव मनाया जा सकता है।


