इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन मलमास समाप्त होता है। उत्तरायण की शुरुआत होती है। इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है। मकर संक्रांति से एक महीने से रुके हुए विवाह और मांगलिक कार्य भी फिर से शुरू हो जाएंगे। ये दिन सूर्य की पूजा करने का और सूर्य के साथ प्रकृति का आभार मनाने का पर्व है। शास्त्रों की मान्यता है कि उत्तरायण से देवताओं का दिन शुरू होता है, ये धर्म-कर्म और दान-पुण्य के नजरिए से संक्रांति का महत्व काफी अधिक है। इस दिन किए गए नदी स्नान, पूजन और दान से अक्षय पुण्य मिलता है, ऐसा पुण्य जिसका असर जीवनभर बना रहता है। श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पंचांग के संपादक पंडित अमित शर्मा ने बताया कि 14 जनवरी को सूर्य दोपहर 2 बजकर 53 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय पुण्यकाल होगा। धर्मसिन्धु के अनुसार, इस दिन स्नान न करने वाला व्यक्ति सात जन्मों तक रोगी और निर्धन रहता है। इस बार मकर संक्रांति बालव करण में होने के कारण भूत जाति और कुमार अवस्था की है, यह बाघ पर सवार है और पीले वस्त्र धारण किए हुए है। इसके हाथ में गदा है और खीर का सेवन कर रही है। इसने कुंकुम लेपन किया हुआ है और जातीपुष्प के साथ प्रवेश कर रही है। यह संक्रांति बैठी हुई है, जो धर्म, स्वास्थ्य और वर्षा के लिए सामान्य फल वाली है। इस मकर संक्रांति के सूर्य का नाम ‘भग’ है ज्योतिषाचार्य मुदित मित्तल ने बताया- मकर संक्रांति पुष्य नक्षत्र में हो रही है। इसलिए अन्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं का भाव स्थिर रहेगा। जिन जातकों का जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ है, उनके लिए यह संक्रांति थोड़ा कठिन समय ला सकती है। ऐसे जातक एक माह तक कष्ट और धनहानि से बचने के लिए कमल, हल्दी, और पीली सरसों मिले जल से स्नान करें।


