मकर संक्रांति पर भक्तिमय हुआ शहर:मंदिरों में विशेष आरती, गुरुद्वारों में सजाए धार्मिक दीवान

भास्कर न्यूज | जालंधर मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पूरे शहर में धार्मिक उल्लास और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। कड़ाके की ठंड के बावजूद, सूर्य के उत्तरायण होने के इस पर्व पर तड़के से ही श्रद्धालुओं का सैलाब मंदिरों और गुरुद्वारा साहिबों में उमड़ पड़ा। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति प्रमुख त्योहार माना गया है। पर्व का संबंध सूर्य भगवान से है और सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो इसे संक्रांति कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार ग्रहों के राजा सूर्य भगवान हैं। बुधवार को तल्हन साहिब के गुरुद्वारा शहीद बाबा निहाल सिंह, डेरा सचखंड बल्लां, श्री श्री राधा कृष्ण मंदिर न्यू बारादरी, शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर, प्राचीन मंदिर बाबा यशरथ राय जी श्री बालाजी धाम थापरा मोहल्ला, कष्ट निवारण श्री बालाजी मंदिर शेखां बाजार, श्री राम मंदिर छोटी अयोध्या सूर्या एनक्लेव व अन्य धार्मिक अस्थानों में विधिवत पूजन करके माघी व मकर संक्रांति के मौके पर धार्मिक आयोजन श्रद्धापूर्वक करवाए गए। विद्वानों के अनुसार संक्रांति के दिन गुड़ और तिल से बनी मिठाइयां खाते हैं और दान करते हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा करने से पुण्य हजार गुना हो जाता है। जिक्रयोग है कि धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ मकर संक्रांति पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व दिखा। मंदिरों के बाहर और प्रमुख चौराहों पर स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा जरूरतमंदों को कंबल, ऊनी वस्त्र और अनाज वितरित किया गया। इस वर्ष मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का संयोग होने के कारण तिल के दान का विशेष महत्व रहा, जिसे श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर निभाया। शहर के प्राचीन और प्रमुख मंदिरों में सुबह 5 बजे से ही भक्तों की कतारें लगने लगीं। विशेष रूप से सूर्य मंदिरों और शिव मंदिरों में भारी भीड़ देखी गई। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर के समय हो रहा है। इस कारण पुण्य काल का महत्व और बढ़ गया है। मंदिरों में पंडितों द्वारा विशेष आरती और सूर्य पूजा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान को तिल, गुड़ और नए अनाज का भोग लगाया। कई स्थानों पर खिचड़ी उत्सव मनाया गया, जहां भक्तों के बीच गरमा-गरम खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया गया। भक्तों ने भगवान से सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की।

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