धौलपुर में धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले पवित्र तीर्थराज मचकुंड सरोवर की दुर्दशा ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों की परेशानी बढ़ा दी है। सरोवर में बढ़ती गंदगी, गाद और दुर्गंध के कारण यहां आने वाले श्रद्धालु मायूस होकर लौट रहे हैं। वातावरण इतना प्रदूषित हो चुका है कि कई पर्यटक सरोवर पर रुके बिना ही वापस लौट जाते हैं, जिससे धार्मिक पर्यटन पर भी असर पड़ रहा है। मचकुंड धाम के महंत कृष्ण दास ने बताया कि सरोवर की बिगड़ती स्थिति को लेकर उन्होंने जिला प्रशासन, नगर परिषद और राज्य सरकार से कई बार शिकायतें कीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा-लोग आस्था से आते हैं, लेकिन बदबू और गंदगी देखकर निराश होकर लौट जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सरोवर में लगातार कचरा और गाद जमा होने से पानी प्रदूषित हो रहा है और मच्छरों व कीटों की बढ़ोतरी का खतरा बढ़ रहा है, जो स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि दुर्गंध के चलते व्यापार पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। श्रद्धालु अधिक देर रुकना पसंद नहीं करते, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से तत्काल सफाई अभियान, नियमित रखरखाव व्यवस्था और कचरा फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि मचकुंड सरोवर धार्मिक आस्था का प्रतीक है और इसके संरक्षण में देरी शहर की सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचा सकती है।


