राजनांदगांव| जूनागढ़ गुजरात से पहुंचे कथा वाचक शास्त्री ईश्वर चंद्र व्यास ने कहा कि मच्छर शरीर के बाहर और मत्सर शरीर के अंदर कष्ट देते हैं। शरीर के बाहर कष्ट पहुंचाने वाले को तो आप सहन कर लेंगे लेकिन शरीर के भीतर कष्ट पहुंचाने वालों को आप कैसे सहन करेंगे। उन्होंने कहा कि मत्सर का मतलब द्वेष-विद्वेष और ईर्ष्या का भाव होता है। गायत्री शक्तिपीठ में माहेश्वरी समाज द्वारा आयोजित श्रीमद देवी भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को सुबह 8 से 9 बजे कथा प्रवचन हुआ। कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा किसी के प्रति द्वेष रखना या फिर ईर्ष्या का भाव रखना काफी कष्टदायक होता है। यह भाव मन के भीतर ना आने दे। कथा के बाद अन्नकूट महाप्रसाद का आयोजन हुआ। भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। 7 अप्रैल को शाम 4 बजे विसर्जन यात्रा निकाली गई जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। महेश्वरी समाज के अध्यक्ष पवन डागा ने बताया कि शास्त्री ईश्वर चंद्र व्यास ने अब तक 650 स्थानों में कथा सुनाई है। राजनांदगांव में छठवीं बार आगमन हुआ। वे रसायन शास्त्र में एमएससी किए हैं। साथ में संस्कृत और व्याकरण का विशेष अभ्यास किया है। वे 15 साल की उम्र से कथा सुना रहे हैं और सभी प्रकार की कथाएं सुनाते हैं। भागवत, रामायण एवं देवी भागवत के साथ ही शिव पुराण में वे विशेष दक्षता रखते हैं।


