पंजाब विजिलेंस द्वारा दर्ज आय से अधिक संपत्ति केस में पंजाब के पूर्व मंत्री व शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को करीब 7 महीने के लंबे इंतजार के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। ऐसे में अब वह इस केस में जेल से बाहर आ जाएंगे। साथ ही अपनी राजनीति कर पाएंगे। लेकिन यह केस अभी तक खत्म नहीं हुआ है। इस मामले की जांच विजिलेंस कर रही है। विजिलेंस ब्यूरो की तरफ से 40 हजार पन्नों की चार्जशीट मोहाली अदालत में मजीठिया फाइल कर दी गई है। जबकि विजिलेंस ने एक और व्यक्ति हरप्रीत सिंह गुलाटी को अरेस्ट किया। उसके खिलाफ भी चार्जशीट फाइल हो चुकी है। अब उन्हें कोर्ट में ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। विजिलेंस ने मजीठिया के खिलाफ 195 के करीब सरकारी गवाह बनाए है। जिसमें पंजाब पुलिस के पुराने अधिकारी, उनके करीब दोस्त और ईडी के पूर्व अधिकारी तक शामिल है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, जो कि पेशे से एडवोकेट भी हैं, ने कहा कि जमानत का यह मतलब नहीं है कि उन पर लगे आरोप खत्म हो गए हैं। उन्हें ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। एजेंसी के पास पुख्ता सबूत हैं। वहीं, वे यहां तक कहते हैं कि अब सारे मामले को देखेंगे और जरूरत पड़ी तो जमानत के खिलाफ भी रिव्यू पिटीशन दायर करेंगे। सवाल – बिक्रम सिंह मजीठिया को किस मामले में जेल में है। जबाव – बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ मुख्य मामला आय से अधिक संपत्ति का है, जो कि करप्शन एकट 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 13(1)(b) और 13(2) के तहत दर्ज है। यह मामला 2007 से 2017 की अवधि से जुड़ा है, जब वे पंजाब विधानसभा के सदस्य और कैबिनेट मंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने ₹540 करोड़ से अधिक की संपत्ति जमा की, जो उनकी ज्ञात आय से कहीं अधिक है। यह संपत्ति कथित तौर पर ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग (₹540 करोड़ की ड्रग मनी) से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें शेल कंपनियां, हवाला नेटवर्क, बेनामी संपत्तियां, और साइप्रस व सिंगापुर जैसी विदेशी संस्थाओं का जिक्र है। मामला 2021 में दर्ज NDPS मामले की जांच से निकला, जहां SIT (Special Investigation Team) की रिपोर्ट पर जून 2025 में FIR दर्ज हुई। जांच में ₹700 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ, जिसमें 400 बैंक खाते, लक्जरी संपत्तियां और 1,200% से अधिक आय से अधिक संपत्ति शामिल है। सवाल – मजीठिया को कब गिरफ्तार किया गया? जवाब – मजीठिया को 25 जून 2025 को गिरफ्तार किया गया। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने अमृतसर में उनके आवास पर छापा मारा और गिरफ्तारी की। यह कार्रवाई SIT की रिपोर्ट के आधार पर हुई, जिसमें ड्रग मामले की जांच से संपत्ति के आरोप निकले। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मोहाली कोर्ट में पेश किया गया और शुरुआत में पुलिस रिमांड, फिर ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा गया। सवाल – वह कब से किस जेल में बंद हैं? जवाब – वे 25 जून 2025 को गिरफ्तार हुए थे। शुरुआत में मोहाली कोर्ट ने 14 दिनों की ज्यूडिशियल कस्टडी दी, जो समय-समय पर बढ़ती रही। लेेकिन उसके बाद से नाभा जेल में बद है। उन्होंने जीवन को खतरा बताते हुए चंडीगढ़ जेल में शिफ्ट करने की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे विचार किया पर मुख्यतः नाभा जेल में ही रहे।
सवाल – बिक्रम मजीठिया की याचिकाएं कैसे कैंसिल मोहाली कोर्ट में 18 अगस्त 2025 को जमानत याचिका खारिज हुई। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 4 दिसंबर 2025 को रेगुलर बेल याचिक खारिज की। आरोपों को गंभीर बताया। सुनवाई लंबी चली। फिर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की। 19 जनवरी 2026 को सुनवाई हुई, जहां कोर्ट ने 2 फरवरी 2026 को सरकार को जवाब देने के लिए कहा। कुल मिलाकर, कम से कम 3 प्रमुख याचिकाओं (ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में एक से अधिक) के बाद 2 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मंजूर की। NDPS मामले में 2022 में पहले से bail मिल चुकी थी। सवाल – क्या मामला अभी भी जारी है? जवाब – हां। मजीठिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है। जांच एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट और सबूतों के आधार पर ट्रायल आगे चलेगा। सवाल – सुप्रीम कोर्ट ने जमानत क्यों दी? जवाब – लंबी हिरासत – मजीठिया पिछले 7 महीने (जून 2025 से) से हिरासत में थे। कोर्ट ने इसे लंबी अवधि की हिरासत माना, खासकर जब जांच पूरी हो चुकी हो। चार्जशीट फाइल हो चुकी – विजिलेंस ने सेक्शन 173(2) CrPC के तहत चार्जशीट (पुलिस रिपोर्ट) दाखिल कर दी थी। यानी जांच पूरी हो चुकी है और अब ट्रायल का चरण शुरू हो सकता है। ऐसे में आगे हिरासत में रखने की जरूरत नहीं समझी गई। पिछले जुड़े NDPS मामले में जमानत – मजीठिया को पहले NDPS (नारकोटिक ड्रग्स) मामले में 2022 में जमानत मिली थी, और पंजाब सरकार की SLP (स्पेशल लीव पिटीशन) को सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में खारिज कर दिया था। यह फैक्टर उनके पक्ष में गया। केस का पुराना चेक पीरियड – मामला 2007–2017 के बीच की संपत्ति से जुड़ा है, लेकिन FIR 2025 में दर्ज हुई। कोर्ट ने इसे भी ध्यान में रखा कि पुराने मामले में अब तक कोई गंभीर बाधा या सहयोग न करने का आरोप साबित नहीं हुआ। सवाल – क्या जमानत शर्तों के साथ होती है? अभी तक जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से किसी तरह की कोई शर्त नहीं लगाई गई है। राज्य सरकार ने विदेश न जाने जैसी शर्तों की मांग की थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने उन्हें इस संबंध में ट्रायल कोर्ट में एप्लीकेशन दायर करने को कहा है। संबंधित अदालत से उन्हें जमानत की शर्तें तय करवानी होंगी। हालांकि, जब भी इस तरह के केस दर्ज होते हैं, तो पासपोर्ट अदालत में जमा रहता है। अगर किसी को बाहर जाना होता है, तो एप्लीकेशन फाइल करनी होती है। फिर सरकार से जवाब दाखिल होने के बाद आगे की कार्रवाई होती है। जांच में सहयोग करना और गवाहों को प्रभावित नहीं करना जैसी शर्तें आमतौर पर रहती हैं। सवाल – इस बेल के राजनीतिक मायने क्या हैं मजीठिया ऐसे समय में जेल से जमानत पर बाहर आ रहे हैं, जब चुनाव में अब एक साल से भी कम समय रह गया है। वहीं, तरनतारन उपचुनाव और जिला परिषद व ब्लाॅक समिति चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन सुधरा है। ऐसे में उनका आना पार्टी में नई जान आएगी। मजीठिया SAD के सबसे प्रभावशाली और आक्रामक चेहरों में से एक हैं, खासकर जाट सिख और माझा इलाके में उनकी अच्छी पकड़ है। मजीठिया अब सक्रिय रूप से प्रचार, रैलियां और पार्टी को एकजुट करने में भूमिका निभा सकते हैं, जो SAD की 2027 चुनावी तैयारी को मजबूत करेगा। हाल ही में सुखबीर सिंह बादल का जेल में उनसे मिलना भी इसी संकेत देता है कि पार्टी उन्हें फिर से फ्रंटलाइन पर लाना चाहती है। विपक्षी दल पड़ेगा कमजोर AAP ने मजीठिया को ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग केस से जोड़कर “ड्रग तस्करों के संरक्षक” के रूप में पेश किया था। जमानत मिलने से AAP का नैरेटिव कमजोर पड़ता है। पंजाब सरकार के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि “जमानत मिलना बरी होना नहीं है, हमारे पास मजबूत सबूत हैं”, लेकिन विपक्ष इसे सरकार की जांच की कमजोरी बताएगा। यह AAP के लिए इमेज डैमेज का कारण बन सकता है, क्योंकि मजीठिया अब बाहर आकर AAP पर हमला बोल सकते हैं और पुराने ड्रग्स मामले को राजनीतिक साजिश बता सकते हैं। जमानत के ठीक समय पर राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने जेल में मजीठिया से मुलाकात की और ड्रग्स आरोपों को झूठा बताया। यह मुलाकात अप्रत्याशित और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि डेरा ब्यास का पंजाब में बड़ा वोट बैंक है (खासकर मजहबी सिख और ग्रामीण इलाकों में)। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह डेरा का SAD की ओर झुकाव या मध्यस्थता की कोशिश का संकेत हो सकता है, जो 2027 में गठबंधन या समर्थन की संभावना बढ़ाता है।


