जिले की 7 विधानसभा में मतदाता पुनरीक्षण के बाद अभी भी 26398 वोट ऐसे हैं जिनका कटना तय है। क्योंकि इन वोटों का कोई हिसाब नहीं मिल रहा। ना तो लोग दस्तावेज दे रहे हैं और ना ही उनका कोई पता लग रहा है। नेताओं के लिए चिंता की बात ये है कि 7 विधानसभाओं से 72795 वोट दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं जो आने वाले चुनावों में समीकरण बदलेंगे। हालांकि इसमें से 27976 मतदाता मृत होने के कारण बाहर हो जाएंगे। पूरे जिले में अब तक जिनकी मैपिंग नहीं हुई उसमें एक लाख 973 मतदाता शामिल हैं। इसमें ही शिफ्ट और मृतक वोट शामिल हैं। मृतक और शिफ्ट वाले मतदाताओं को हटा दें तो भी सबसे ज्यादा वोट बीकानेर पूर्व में 13185, पश्चिम में 10372, खाजूवाला में 4390, कोलायत में 5990, लूणकरणसर में 6690, श्रीडूंगरगढ़ में 5664 और नोखा में 6183 वोट कटेंगे। क्योंकि मृतक और स्थायी रूप से शिफ्ट हुए वोटों के बाद भी इन वोटों का कुछ भी पता नहीं लग रहा। बीएलओ घर-घर जाने के बाद भी इनका कुछ का ना तो पता मिल रहा कुछ के कागजात मेल नहीं खा रहे हैं। दरअसल घर-घर मतदाता पुनरीक्षण का काम पूरा हो गया। मतदाता खुद भी चलकर बीएलओ के पास आकर मैपिंग करा सकते थे। उसका भी समय खत्म हो गया। अब 30 दिन वो आखिरी बचे हैं जिसमें लोगों के घर नोटिस देकर उन्हें अपने दस्तावेज दिखाने का मौका है। अगर ये मौका भी चूक गए तो उसके बाद उनका वोट कट जाएगा और आने वाले निकाय और पंचायत चुनाव में वे भागीदारी नहीं कर पाएंगे। हालांकि 27976 मृत मतदाताओं के वोट आज नहीं तो चुनाव से पहले अंतिम मतदाता सूची में कट जाते जो अभी कट गए। इसलिए कुल मिलाकर करीब एक लाख वोट अब भी जिले से कम होंगे। यानी जो जिले में अभी 18 लाख 54 हजार वोट हैं उसमें एक लाख वोट कम होने के बाद सिर्फ 17 लाख 50 हजार के आसपास ही वोट बचेंगे। एक लाख वोट आने वाले चुनावों पर कितना असर करेंगे ये समय बताएगा मगर बीकानेर पूर्व, पश्चिम और खाजूवाला विधानसभा के समीकरण बदलने तय हैं। पार्टियां नहीं समझ रही इन वोटों का गणित विधानसभा चुनाव में पांच हजार वोट बहुत मायने रखते हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में सिद्धि कुमारी करीब 7 हजार वोटों से जीती थीं और उसी विधानसभा में अब 13 हजार वोट कटने की कगार पर हैं। बीकानेर पश्चिम में भी तकरीबन 9 हजार वोट कट सकते है। खाजूवाला विधानसभा में तो बीकानेर शहर से जुड़ी नई कॉलोनियां के बहुतायत वोट कट सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों को अब चिंतन करने की जरूरत है कि आने वाले वक्त एसआईआर क्या असर डालेगा। जानकारों का कहना है कि बीकानेर पूर्व से कटे वोट बहुतायत में भाजपा को असर करेगा क्योंकि एक तबका जो रहता तो शहर में है लेकिन उसने वोट ग्रामीण क्षेत्र में रखे है और इसका सीधा-सीधा नुकसान बीकानेर पूर्व को होता लग रहा है। हालांकि अभी सभी राजनीतिक दल निश्चित है मगर जब चुनाव करीब आएगा और मतदाता सूची फाइनल होगा उस वक्त कई दावेदारों के पैरो से जमीन खिसक जाएगी क्योंकि 13 हजार वोटों की शिफ्टिंग उनका गणित बिगाड़ देगा। दोहरीकरण हटा, इसलिए 72 हजार वोट शिफ्ट हुए बीकानेर की सातों विधानसभाओं से करीब 72 हजार वोट ऐसे हैं जो स्थायी रूप से यहां से शिफ्ट हो गए। इसमें से 5000 के करीब वोट ऐसे हैं जो दूसरे राज्यों के हैं। उन लोगों के दोहरे वोट होने के कारण अब एक ही जगह वोट रखवाए हैं और वो उनके होम स्टेट के हैं। मगर बीकानेर पूर्व समेत कुछ और विधानसभाएं ऐसी हैं जहां लोगों के ग्राम पंचायत में भी वोट रहे और शहर में भी। करीब 8 से 10 हजार वोट ऐसे हैं जो लोगों ने ग्राम पंचायतों में ही रखवाए हैं क्योंकि पंचायतों की राजनीति ग्रामीण क्षेत्र की धुरी है। इसलिए बीकानेर पूर्व विधानसभा से सबसे ज्यादा वोट कटे हैं। अब एक महीने तक जुड़वा सकेंगे नए वोट जो बालिग हो गए। या किसी का वोट कहीं और से कट गया तो वो लोग अब 15 जनवरी तक अपना वोट जुड़वा सकेंगे बशर्ते उनका अन्यत्र कहीं वोट ना हो। इसके लिए बीएलओ के पास या ऑनलाइन वोट जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा जिन लोगों ने एसआईआर में अब तक दस्तावेज नहीं दिए या उनको कोई आपत्ति है तो वो अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। “अब वोट नए भी जोड़े जा सकते हैं। जिनको कोई कोई आपत्ति हो वो भी दर्ज हो सकती है। एसआईआर का काम लगभग पूरा हो गया।” -सुरेश यादव, एडीएम प्रशासन


