बांसवाड़ा। जीजीटीयू के विधि महाविद्यालय की ओर से विधि शिक्षा को व्यवहारिक, अनुभव-आधारित और समाजोपयोगी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए एलएलबी तृतीय वर्ष के विधि विद्यार्थियों ने सिटी कोतवाली का शैक्षणिक अवलोकन किया। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पुलिस थाना की कार्यप्रणाली, आपराधिक न्याय प्रणाली में पुलिस की भूमिका और कानून के व्यवहारिक क्रियान्वयन की वास्तविक प्रक्रिया से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना रहा। इस दौरान विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर प्रशासनिक और विधिक प्रक्रियाओं को नजदीक से देखने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ। कोतवाली के एसआई गोविंद सिंह ने कहा कि विधि विद्यार्थियों के लिए पुलिस थाना का भ्रमण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि आपराधिक न्याय प्रक्रिया की वास्तविक शुरुआत पुलिस थाना से ही होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्राथमिकी दर्ज करने की विधि, विवेचना की प्रक्रिया, साक्ष्यों के महत्व, महिला सहायता डेस्क की कार्यप्रणाली तथा साइबर अपराधों से निपटने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही उन्होंने ट्रैफिक नियमों की जानकारी देते हुए गुणवत्तापूर्ण हेलमेट पहनने का आह्वान किया। कुलगुरु प्रो. केशव सिंह ठाकुर ने अपने संदेश में कहा कि विधि शिक्षा केवल सैद्धांतिक अध्ययन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि व्यवहारिक प्रशिक्षण इसका अभिन्न अंग है। लॉ कॉलेज के डॉ. राकेश डामोर ने कहा कि पुलिस थाना भ्रमण विधि विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण व्यावहारिक अनुभव है। अकादमिक प्रभारी प्रो. शफकत राणा ने कहा कि शैक्षणिक भ्रमण विधि अध्ययन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है।


