भास्कर न्यूज | अंबिकापुर राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय व अनुसंधान केंद्र के सभागार में राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड और हनी मिशन के तहत दो दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण 26-27 मार्च को हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके सिन्हा ने की। संयोजक और मुख्य अन्वेषक डॉ. पीके भगत ने सरगुजा अंचल से आए किसानों को मधुमक्खी पालन की विस्तृत जानकारी दी। देसी, इटालियन और डंकरहित मधुमक्खी को पालने योग्य बताया। मधुमक्खी पालन के लिए आवश्यक उपकरणों की जानकारी भी दी। डॉ. सिन्हा ने सरगुजा में मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाओं पर जोर दिया। इसे अतिरिक्त आय का साधन बताया। मधुमक्खी द्वारा परागण से फसलों के उत्पादन में वृद्धि की जानकारी दी। सालभर फूलों की खेती करने के फायदे भी बताए गए। विशिष्ट अतिथि और कृषि महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. जीपी पैकरा ने मधुमक्खियों में लगने वाले कीट और रोगों की जानकारी दी। उनके नियंत्रण के उपाय भी समझाए। डॉ. केएल पैकरा ने मौसमी प्रबंधन पर जानकारी दी। डॉ. सचिन कुमार जायसवाल ने शहद, पराग, मोम, रॉयल जैली, प्रॉपॉलिस और मधु विष के उत्पादन की जानकारी दी। वैज्ञानिक विधि से शहद निष्कासन की प्रक्रिया भी बताई। वैभव जायसवाल ने मधु वाटिका भ्रमण के दौरान मधुमक्खी की प्रजातियों की पहचान और उनकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला। डॉ. स्नेहा तिवारी ने मधुमक्खी पालन के लिए उचित स्थान चयन की जानकारी दी। इस दौरान डॉ. रंजीत कुमार भी उपस्थित रहे। सरगुजा अंचल के बढ़नी झरिया, महुआ टिकरा, बिनिया, डिगमा, नेहरू नगर, भकुरा, बिलकरा, पुहपुटरा, नर्मदापारा, उदयपुर, कंचनपुर, रामपुर, झेराडीह, पिपरिया, पीपरखार, असकला, जोगीबांध, करौंदी, बिनकरा, भिट्ठीकला, लहपटरा, जजगा, बिहासी नवापारा, थोर, सरगवां, लखनपुर और सरमा से आए 227 ग्रामीण किसानों ने प्रशिक्षण में भाग लिया।


