मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मंगलवार को मंत्रालय में विभागीय समीक्षा बैठक की है। जहां स्वास्थ्य सेवाओं, मानव संसाधन, नर्सिंग शिक्षा, मेडिकल कॉलेजों, ब्लड ट्रांसफ्यूजन सिस्टम और अधोसंरचना विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। डिप्टी सीएम ने उपकरणों की उपलब्धता के साथ उनके उपयोग की मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया। डिप्टी सीएम ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल डिवाइस का मरीजों तक लाभ पहुंच रहा है या नहीं, इसकी हर माह रिपोर्ट तैयार करें। अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किस डिवाइस का कितने मरीजों को फायदा मिला, इसका पूरा ब्योरा लेकर अगली बैठक में आएं। जहां उपकरण की कमी है, यह जानकारी भी एकत्र करें। इसके अलावा मेडिकल टीचर्स के वेतन, भर्ती प्रक्रियाएं, एनएटी सुविधा, ई-अटेंडेंस सिस्टम और आउटसोर्स कर्मियों से जुड़े सुधारों पर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। रिक्त पदों पर होगी भर्ती
बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, अस्पतालों की क्षमताओं और मैदानी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता पर विस्तृत समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ब्यौहारी, बुढ़ार और उमरिया क्षेत्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रिक्त पदों की शीघ्र भर्ती के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता से आम लोगों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, ऐसे में इन पदों की समयबद्ध पूर्ति जरूरी है। नर्सिंग शिक्षा को मिलेगी मजबूती
नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षण गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नर्सिंग टीचर्स के 59 राजपत्रित पदों की मांग को जल्द लोक सेवा आयोग को भेजने के निर्देश दिए गए। साथ ही सिंगरौली नर्सिंग कॉलेज के लिए भूमि चिह्नांकन और निविदा प्रक्रिया की समयबद्ध पूर्ति पर जोर दिया गया। उपकरणों की उपलब्धता और उपयोग पर सख्त नजर
बैठक में उपकरणों की उपलब्धता के साथ उनके उपयोग की वास्तविक मॉनिटरिंग पर जोर दिया है। कई जगह उपकरण वर्षों से उपलब्ध हैं, लेकिन उपयोग नहीं हो पा रहा है। शुक्ल ने कहा कि मशीनें तभी उपयोगी साबित होंगी जब उनका उपयोग लगातार और जरूरत के समय हो, इसलिए उपकरणों की ‘रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम’ विकसित किया जाए। मेडिकल कॉलेजों में सुधार की तैयारियां
मेडिकल टीचर्स के वेतन एवं भत्तों को लेकर समीक्षा की गई। नए मेडिकल कॉलेजों में ट्यूटर व डिमॉन्स्ट्रेटर के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती का निर्देश भी दिया गया। ग्वालियर मेडिकल कॉलेज में सीटीवीएस (हार्ट बायपास) विभाग स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू करने का निर्देश दिया गया, जिससे प्रदेश में कार्डियक सर्जरी की सेवाएं बेहतर हो सकें। ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेवाओं में आएगा सुधार
उप मुख्यमंत्री ने राज्य में एनएटी (Nucleic Acid Testing) सुविधा का विस्तार करने पर जोर दिया। यह तकनीक रक्त में एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और सी जैसे संक्रमणों की शुरुआती अवस्था में पहचान कर मरीजों की सुरक्षा को मजबूत बनाती है। रक्तदान एवं रक्ताधान सेवाओं में सुधार को विभाग की प्राथमिकता बताया गया। ई-अटेंडेंस, ऑनलाइन NOC और निवेश नीति पर भी फोकस
बॉन्ड डॉक्टरों के लिए एकीकृत ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने और ऑनलाइन NOC जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत पूर्व निवेश नीति से जुड़े प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।


