मनरेगा का हाल: पंजीकृत 1.58 लाख में से 40 हजार मजदूरों को ही मिल रहा रोजगार

भास्कर न्यूज | बालोद जिले में मनरेगा के तहत 1 लाख 58 हजार पंजीकृत मजदूर एक्टिव हैं। जिसमें वर्तमान में मनरेगा के तहत सिर्फ 40 हजार 10 मजदूर कार्यरत हैं। यूं कहे कि इतने मजदूरों को ही रोजगार मिल पा रहा है। जिले के 5 जनपद में कुल 436 ग्राम पंचायत हैं। जिसमें 91 ग्राम पंचायतों में बुधवार की स्थिति में काम ही शुरू नहीं हो पाया था। ऐसी स्थिति क्यों है, इस संंबंध में मनरेगा काम की मॉनिटरिंग करने वाले एपीओ ओमप्रकाश साहू भी पोल न खुल जाए इसलिए जानबूझकर कुछ बता नहीं पा रहे हैं। वहीं मनरेगा संबंधित जानकारी के लिए एपीओ के भरोसे रहने वाले अफसर भी मौन है। बुधवार दोपहर तक की स्थिति में जिले के 436 में से 345 ग्राम पंचायत में 40 हजार 10 मजदूर कार्यरत थे यानी एक लाख से ज्यादा मजदूर मनरेगा से दूर हैं। रोजाना कहीं काम शुरू होता है, कहीं बंद रहता है। ऐसे में आगे आंकड़े बदल सकते हैं। साल मंे 100 से ज्यादा दिन रोजगार देने के दावे खोखले: मनरेगा के तहत एक साल में एक मजदूर को 100 से 150 दिन तक रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। विभागीय अफसर भी दावा करते है कि अधिकांश मजदूरों को 100 से ज्यादा दिन तक मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराते है लेकिन सच्चाई यह है कि अधिकांश मजदूरों को तीन माह तो दूर दो माह तक काम नहीं मिल पाता। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते है कि जिला बनने के बाद हर वित्तीय वर्ष में कितने लोगों को 100 या इससे ज्यादा दिन मनरेगा के तहत रोजगार मिला है। एक दिन काम करने पर 261 रुपए मजदूरी दर तय मनरेगा के तहत एक दिन काम करने के एवज में एक मजदूर का मजदूरी दर 261 रुपए शासन स्तर से तय किया गया है। एक साल पहले मजदूरी दर 243 रुपए मिल रहा था। एक साल में मजदूरी दर में 18 रुपए का इजाफा हुआ है। वहीं 17 साल में 161 रुपए का इजाफा हो चुका है। वित्तीय वर्ष 2008-09 से लेकर 2010-11 तक प्रतिदिन की मजदूरी दर 100 रुपए निर्धारित थी। वर्ष 2011-12 में 120 रुपए, 2012-13 में 125 रुपए, 2013-14 में 142 मजदूरी दर निर्धारित हुई। तब से लेकर अब तक हर साल मजदूरी दर में इजाफा हो रहा है। हालांकि हर साल महंगाई भी बढ़ती जा रही है। एक अप्रैल 2008 से मनरेगा योजना को बालोद सहित देश के सभी जिलों में लागू किया गया है।

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