नागौर में मनरेगा योजना का नाम बदलने और योजना में बदलाव के विरोध में एक ज्ञापन सौंपकर विरोध प्रदर्शन किया गया। नागौर कांग्रेस जिलाध्यक्ष हनुमानराम बांगड़ा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारियों और श्रमिकों ने जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए मांग की कि महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (मनरेगा) के प्रावधानों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न की जाए।
गरीब और मजदूर के आत्मसम्मान का अधिकार है मनरेगा ज्ञापन सौंपने के बाद जिलाध्यक्ष हनुमानराम बांगड़ा ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना मात्र नहीं है, बल्कि यह देश के गरीब, मजदूर और किसान के आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ अधिकार है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में जिस मंशा के साथ इस कानून को लागू किया गया था, उसे उसी रूप में बहाल रखा जाना चाहिए। बांगड़ा ने आरोप लगाया कि वर्तमान में इस जनकल्याणकारी कानून को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं, जबकि संविधान के मूल मूल्यों न्याय, समानता और रोजगार की रक्षा करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
रोजगार छीनने और पंचायतों को कमजोर करने का आरोप कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस शिक्षक प्रकोष्ठ के शहर ब्लॉक अध्यक्ष चिरंजीव सिंह राठौड़ ने कहा कि मनरेगा योजना गरीब परिवारों की आजीविका का सबसे बड़ा सहारा रही है, लेकिन अब केंद्र सरकार नाम बदलने के बहाने इसे खत्म करने की राह पर है। वहीं ग्रामीण ब्लॉक अध्यक्ष कुंभाराम ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार मनरेगा को खत्म कर ग्रामीणों से रोजगार छीनना चाहती है और पंचायतों की शक्तियों को बांधकर उन्हें पंगु बनाने का प्रयास कर रही है।


