मनरेगा बचाओ संग्राम:मजदूरों से काम का अधिकार छीन रहे

मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत कांग्रेस ने शुक्रवार को राजधानी में जनसंपर्क पदयात्रा निकाली। पदयात्रा प्रदेश माता कौशल्या धाम चंदखुरी से शुरू होकर पुराने विधानसभा भवन पहुंची। इससे पहले चंदखुरी में जनसभा का आयोजन हुआ, जिसमें केंद्र सरकार के मनरेगा से जुड़े फैसलों को मजदूर विरोधी बताया गया। जनसभा को संबोधित करते हुए दीपक बैज ने कहा कि मोदी सरकार गांव के मजदूरों का रोजगार छीनने पर आमादा है। मनरेगा बंद हुआ तो ग्रामीण इलाकों में रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सुधार के नाम पर लोकसभा में जो नया कानून लाया गया है, उससे दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को खत्म करने की तैयारी है। पदयात्रा से पहले कांग्रेस नेताओं ने माता कौशल्या मंदिर में दर्शन-पूजन किया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा, डॉ. शिवकुमार डहरिया, पूर्व सांसद छाया वर्मा, रायपुर शहर अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन, ग्रामीण अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे, संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा को कमजोर करने के खिलाफ यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और सड़क से सदन तक आवाज उठाई जाएगी। सरकार तय करेगी कि गरीब कब काम करेगा
पहले मनरेगा पूरी तरह केंद्रीय कानून था और 90 फीसदी राशि केंद्र सरकार देती थी, लेकिन अब केंद्र-राज्य हिस्सेदारी 60-40 कर दी गई है। इसका सीधा असर राज्यों पर पड़ेगा और बजट का बोझ बढ़ते ही मनरेगा के काम बंद होने लगेंगे। बैज ने कहा कि पहले मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले काम के अधिकार की गारंटी थी। नए सिस्टम में इसे सशर्त और केंद्र के नियंत्रण वाली योजना बना दिया गया है। अब हर साल तय समय के लिए काम रोके जाने का रास्ता खोल दिया गया है। इससे सरकार यह तय करेगी कि गरीब कब काम करेगा और कब भूखा रहेगा। फंड खत्म होते ही या खेती के मौसम में मजदूरों को महीनों तक काम नहीं मिलेगा।

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