भास्कर न्यूज | डौंडी ब्लाक के ग्राम पंचायत कांडे में मनरेगा के तहत गहरीकरण कार्य के लिए राशि स्वीकृत है। इस काम के लिए 300 से ज्यादा मजदूर पहुंचे। लेकिन सरपंच चंद्रलेखा पायला ने मजदूरों से गहरीकरण का काम न कराकर उन्हें गौठान में पौधरोपण के लिए गड्ढे खोदने में लगा दिया। जबकि पौधरोपण का काम मनरेगा से स्वीकृत नहीं हुआ है। मजदूरों ने बताया कि वे मनरेगा के तहत ही यह काम कर रहे हैं। सरपंच के कहने पर ही वे पौधे लगाने गड्ढे कर रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि उन्हें मनरेगा के तहत मजदूरी दी जाएगी। वहीं सरपंच का कहना है कि यह काम गांव के लोगों द्वारा श्रमदान के रूप में कराया जा रहा है। मजदूरों और सरपंच के बयान अलग-अलग होने से मामला संदिग्ध हो गया है। सरपंच ने कहा कि यह श्रमदान है लेकिन मजदूरों ने कहा कि वे मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं। इससे यह आशंका है कि सरपंच मनरेगा मजदूरों से काम कराकर उसे पौधरोपण के नाम पर रिकॉर्ड में दिखाना चाह रही हैं। मनरेगा जैसी योजना में इस तरह की गड़बड़ी सामने आना गंभीर मामला है। यदि जांच सही तरीके से की जाए तो मनरेगा के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी उजागर हो सकती है। अन्य स्थल पर काम कराया तो इसे फर्जी माना जाएगा इस संबंध में सरपंच चंद्रलेखा पायला ने कहा कि पौधरोपण के लिए मजदूरों ने श्रमदान किया है। पौधों के लिए वनविभाग से संपर्क किया गया है। वहीं मनरेगा अधिकारी नीरज वर्मा ने कहा कि विभाग को बिना सूचना दिए किसी अन्य स्थल पर कार्य कराया गया है तो यह फर्जी माना जाएगा। तकनीकी सहायक प्रशांत सोनबोईर को भेजकर जांच कराई जाएगी। अगर जांच में यह साबित हुआ कि कार्य मनरेगा स्थल के बजाय अन्यत्र कराया गया है तो मजदूरों की मजदूरी रोक दी जाएगी। वन विभाग के अधिकारी जेएल भांडेकर ने बताया कि ग्राम कांडे में पौधारोपण को लेकर सरपंच ने विभाग से कोई अनुमति नहीं ली है। न ही पौधों की मांग की गई है।


