खींचन ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत करवाए 58 लाख रुपए के विकास कार्यों में घोटाला हुआ। इसकी जांच रिपोर्ट जिला परिषद के सीईओ ने अब संभागीय आयुक्त को सौंप दी है। जिसमें खीचन के सरपंच लता कंवर और ग्राम विकास अधिकारी विजयपाल बाना को दोषी माना गया है। संभागीय आयुक्त अब धारा 38 में कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार को प्रकरण भेजेंगे। ग्राम विकास अधिकारी को 16 सीसी में चार्जशीट थमाई गई है। वहीं जेटीओ व एईएन की भूमिका भी जांची जा रही हैं। दरअसल, फलोदी जिले की ग्राम पंचायत खीचन में मनरेगा के तहत किए गए मुक्तिधाम के विकास कार्य, नाडी खुदाई और धोलकी नाड़ी के निर्माण में बिना कार्य के भुगतान मिलने की शिकायत मिली थी। इसके बाद में कलेक्टर ने जिला परिषद के सीईओ से इसकी जांच करवाई। जांच में सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी, कनिष्ठ तकनीकी सहायक व सहायक अभियंता को दोषी माना गया था। इसकी रिपोर्ट जिला परिषद के सीईओ को भेजी गई। दो जांच, पहली में दोषी, दूसरी में क्लीन चिट, पुरानी रिपोर्ट मानी खास बात यह है कि तत्कालीन विकास अधिकारी नारायण सुथार ने इस मामले की जांच करके रिपोर्ट कलेक्टर व सीईओ को भेजी थी, लेकिन बाद में एसीईओ रहते हुए एक और कमेटी बनाकर सरपंच व ग्राम विकास अधिकारी को क्लीन चिट भी दिलवा दी। इसके बाद में दो रिपोर्ट हो गई तो दोनों रिपोर्ट विरोधाभासी हो गई। अब सीईओ ने पुरानी रिपोर्ट को आधार मानते हुए इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए संभागीय आयुक्त हो रिपोर्ट भेजी है। जिला परिषद के सीईओ धीरज कुमारसिंह ने बताया कि पुरानी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है।


