पीबीएम हॉस्पिटल परिसर स्थित आचार्य तुलसी कैंसर ट्रीटमेंट एंड रिसर्च सेंटर के अॉन्को सर्जिकल विभाग के लिए अलग से बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है। इसक उद्घाटन 26 जनवरी को कराने की कवायद की जा रही है। अॉन्को सर्जिकल विंग में 52 बेड होंगे। कैंसर रोगियों की सर्जरी करने से लेकर भर्ती होने तक की अलग व्यवस्था रहेगी। तीन मंजिला बिल्डिंग का निर्माण भामाशाह सुंदरलाल डागा चैरिटेबल ट्रस्ट ने कराया है। इसका नाम आचार्य नानेश रामेश कैंसर चिकित्सा केंद्र रखा गया है। बिल्डिंग के निर्माण पर करीब चार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इतनी की राशि राज्य सरकार ने भी मंजूर थी, जिससे दो मॉड्यूलर ऑटी, एक आईसीयू और मल्टीपल गैस प्लांट लगाया जाएगा। अॉन्को सर्जिकल विंग को शुरू करने के लिए पीबीएम अधीक्षक से पैरामेडिकल स्टाफ मांगा गया है। सर्जरी विंग अलग होने के कारण नर्सिंग स्टाफ, अटेंडेंट, सफाई कर्मी, गार्ड आदि लगाए जाएंगे। इसे लेकर कैंसर हॉस्पिटल की कार्यवाहक डायरेक्टर डॉ. नीति शर्मा और सर्जिकल अॉन्कोलॉजी के प्रोफेसर एंड हेड डॉ. संदीप गुप्ता ने पीबीएम अधीक्षक के साथ मीटिंग की। सर्जिकल विंग में फिलहाल डॉ. संदीप गुप्ता और असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर डॉ. राजेंद्र बोथरा कार्यरत हैं, जो ट्रस्ट की ओर से लगाए गए हैं। इनके अलावा वहां कोई स्थायी फैकल्टी नहीं है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 2022-23 में कैंसर सर्जरी को अलग से विभाग घोषित कर दिया था, लेकिन वर्तमान में कैंसर सर्जरी और मेडिकल ओंकोलॉजी विभाग एक ही बिल्डिंग में चल रहे हैं। कैंसर सर्जरी का हर महीने 1200 से 1500 मरीजों का ओपीडी रहता है। करीब इतने ही मरीज भर्ती किए जाते हैं। इसके अलावा 500 मेजर और 1500 माइनर सर्जरी के केस होते हैं। नई बिल्डिंग मिलने से मरीजों को काफी सुविधा हो जाएगी। टीसीसी के लिए 13 करोड़ और चाहिए आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर हॉस्पिटल का टर्सरी कैंसर केयर सेंटर 10 साल बाद भी अधूरा है। सेंटर को 2015 में अपग्रेड करते हुए यहां प्रदेश का पहला टर्सरी कैंसर केयर सेंटर स्थापित करने के लिए 45 करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे। केंद्र और राज्य सरकार को 60:40 के अनुपात में यह बजट देना था। सरकारों ने 28 करोड़ रुपए ही दिए, जिससे बिल्डिंग बनी और एक लीनियर एस्सीलेटर मशीन लग गई। सेंटर के लिए ब्रैकीथेरेपी, मैमोग्राफी तथा एक छोटी लीनियर एस्सीलेटर और खरीदी जानी थी, लेकिन उसके लिए बजट ही नहीं मिला। हालांकि बजट के हिसाब से करीब 13 करोड़ बकाया हैं, लेकिन इन मशीनों की कीमत अब बढ़ने से ज्यादा बजट की जरूरत होगी। कैंसर मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह तीनों मशीनें आ गईं तो मरीजों को जांच के लिए लंबा इंतजार नहीं पड़ेगा। मेडिकल अॉन्कोलॉजी का भी विस्तार होगा सर्जिकल विंग अलग होने के बाद मेडिकल अॉन्कोलॉजी का भी विस्तार हो जाएगा। कैंसर हॉस्पिटल में वर्तमान में 240 बेड हैं, जो सर्जरी के मरीजों के भी काम आते हैं। सर्जिकल विंग शुरू होने के बाद पूरे बेड मेडिकल अॉन्कोलॉजी को मिलेंगे। इसी प्रकार टर्सरी केयर सेंटर की बिल्डिंग पर बोन मैरा ट्रांसप्लांट के लिए एक और सेंटर खोलने की योजना है। मेडिकल अॉन्कोलॉजी के प्रोफेसर एंड हेड डॉ. सुरेंद्र बेनीवाल ने बताया कि सरकार ने 10 करोड़ का बजट मंजूर कर रखा है। पिछले साल 18 बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए हैं। स्टाफ की कमी के कारण महीने में एक-दो केस से ज्यादा नहीं लिए जा सकते। उन्होंने बताया कि सर्जिकल विंग शिफ्ट होने के बाद न्यूक्लियर मेडिसिन के लिए भी जगह खाली हो जाएगी। नई सर्जिकल विंग में क्या : ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग और रिसेप्शन, फर्स्ट फ्लोर पर ओपीडी ब्लॉक, कैजुअल्टी और माइनर ओटी, सेकंड फ्लोर पर जनरल वार्ड और पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड तथा थर्ड फ्लोर पर एक आईसीयू और दो मॉड्यूलर ओटी बनाए गए हैं। बिल्डिंग के दो लिफ्ट, रैंप और सीढ़ियां भी हैं। कैंसर सर्जरी में हर महीने 1500 तक का ओपीडी, 500 मेजर और 1500 माइनर सर्जरी होती है


