मनुष्य को समाज का ऋण उतारकर जाना चाहिए : निगोले

खरगोन | शहर के जानकी नगर में सवाई सिंह मंडलोई के उत्तर कार्यक्रम में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर समाजसेवी बलीराम निगोले ने कहा कि मनुष्य पर जन्म से तीन ऋण होते हैं- देव ऋण, पितृ ऋण और समाज ऋण। समाज ऋण ही व्यक्ति को मानवीय रीति-रिवाज, रहन-सहन और जीवन जीने की सीख देता है। कार्यक्रम में भाई देवीसिंह मंडलोई व पुत्र लक्की मंडलोई द्वारा आदिवासी समाज धर्मशाला व छात्रावास के लिए 11 हजार रुपए की राशि भेंट की गई। साथ ही ग्राम समाज धर्मशाला के लिए बर्तन भी प्रदान किए गए। समाजजनों ने कहा कि आज के भौतिकवादी दौर में परंपराओं की तुलना में विवेक को महत्व देना जरूरी है। समाज में व्याप्त कुरीतियों, व्यसनों, दिखावटी फैशन और अनावश्यक खर्च वाली परंपराओं को बंद किया जाना चाहिए। धन का सदुपयोग बच्चों की शिक्षा, सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं और पौधरोपण जैसे कार्यों में किया जाना चाहिए, ताकि दिवंगत आत्मा को अक्षय पुण्य प्राप्त हो सके।

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