मनुष्य योनि ज्ञान-विज्ञान का मूल स्रोत है : धर्मेंद्र गोस्वामी

भास्कर न्यूज | अमृतसर बाजार सरकी बंदा स्थित शिवाला गंगाराम में शुरू की श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कई भक्तजन कथा सुनने पहुंचे। दोपहर 2 से साढ़े 6 बजे तक चली कथा में ब्यास गद्दी पर विराजमान परम पूज्य गुरुदेव धर्मेंद्र स्वामी महाराज श्रीधाम नंद गांव वालों ने कथा में भक्ति रस घोल दिया। उन्होंने कहा कि यह मनुष्य योनि ज्ञान और विज्ञान का मूल स्रोत है। इस प्रकार जो अपने स्वरूप परमात्मा को नहीं जान लेता वह किसी भी योनि में चला जाए उसे कहीं भी शांति नहीं मिल सकती। परमात्मा को जानने का मार्ग है श्रीमद् भागवत कथा। क्योंकि श्री भागवत कथा सुनने से ही हमारा भगवान श्री कृष्ण के प्रति प्रेम का विकास होगा। केवल प्रेम से ही भगवान श्री कृष्णा भक्तों के वश में होते हैं और जो भगवान को वश में कर लेते हैं वह जन्म मृत्यु के बंधन से छूट जाते हैं। प्रेमी भक्त को ही भगवान श्री कृष्ण के दर्शन का अधिकार होता है। अधिकार के बिना भगवान श्री कृष्ण के दर्शन नहीं होते। यदि सुख की इच्छा हमारे मन में बनी रहे तो भगवान के दर्शन नहीं होते। जीव जब पूर्णत निष्काम और वासना रहित होता है तभी वह दर्शन होते हैं। ईश्वर दर्शन के सिवाय अन्य कोई भी वासना सूक्ष्म रूप से शेष रह गई तो ईश्वर दर्शन नहीं देंगे। इस मौके पर स्वामी जी महाराज की ओर से भगवान श्री कृष्ण के कई सुंदर भजन गाए गए जिसे सुनकर भक्तजन मंत्रमुक्त हो उठे। आरती के बाद सभी को प्रसाद वितरण किया। इस मौके पर मंदिर कमेटी के कई सदस्य मौजूद रहे।

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