विधायक रहमान गुरमीत लूथरा | अमृतसर केंद्र की ओर पेश वक्फ बोर्ड कानून संशोधित बिल के चलते प्रदेश की 75 हजार प्रॉपर्टीज के खुर्द-बुर्द होने के बादल मंडरा रहे हैं। मुस्लिम समुदाय को आशंका है कि प्रॉपर्टीज को केंद्र सरकार द्वारा हड़प लिया जाएगा। समुदाय का मानना है कि ऐसी सदियों पुरानी वक्फ प्रॉपर्टीज यानि स्वैच्छा से दानी सज्जनों द्वारा वक्फ बोर्ड को दान की गई प्रॉपर्टीज जिनकी रजिस्ट्री संबंधी दस्तावेज न होने के कारण केंद्र सरकार द्वारा इस बिल के लागू होने की स्थिति में अपने कब्जे में ले लिए जाने की संभावना है। बिल में प्रावधान किया गया है कि अगर वक्फ बोर्ड देश में इन करीब 8 लाख एकड़ में फैली जमीनों की रजिस्ट्रियां उनके नाम पर होने के सबूत पेश नहीं कर पाएगा तो यह समस्त प्रॉपर्टीज सरकार के हवाले हो जाएंगी इन प्रॉपर्टीज में निर्मित मस्जिदें, मदरसे व कब्रिस्तान शामिल हैं। फिलहाल इसके खिलाफ समुदाय की ओर शुरु किए गए आंदोलन के तहत मस्जिदों पर काले झंडे लगाए गए हैं तथा प्रदेश का मुस्लमान समुदाय प्रत्येक शुक्रवार को जुमे की नमाज बाजुओं पर काली पटिट्यां बांधकर अदा कर रहा है। मलेरकोटला से आप के मुस्लिम विधायक एवं प्रदेश वक्फ बोर्ड के सदस्य जमील-उल-रहमान की मानें तो प्रदेश में 75 हजार जमीन-जायदादों में से 70 प्रतिशत पर पहले ही राजनीतिज्ञों ने प्रयत्क्ष अथवा अप्रत्यक्ष तौर से कब्जे कर रखे हैं। मजलिस अहरार इस्लाम-ए-हिंद के पंजाब प्रधान अब्दुल नूर ने कहा है कि वक्फ कानून पूरी तरह से असंवैधानिक है। नूर ने कहा कि केंद्र सरकार का यह कहना कि वक्फ कानून मुसलमानों की भलाई के लिए है झूठ का पुलिंदा है। सरकार ने इस एक्ट के जरिए वक्फ बोर्ड को कमजोर कर दिया है इस बिल के तहत वक्फ बाय यूजर को हटाया गया है, इसके तहत अगर कोई मस्जिद, कब्रिस्तान या दरगाह लंबे समय से यानि सदियों से धार्मिक कार्यों के लिए इस्तेमाल हो रही है तो इस आधार पर यह जमीन वक्फ की जायदाद नहीं मानी जाएगी। इसके लिए रजिस्ट्री के सबूत दिखाने होंगे। अगर सूबत नहीं होंगे तो यह वक्फ जायदादें सरकारी नियंत्रण में चली जाएंगी। 1954 में बने वक्फ एक्ट में 3 बार संशोधन किए जा चुके हैं। 1995 और 2013 में एक्ट में संशोधन के बाद अब 2025 के संशोधन में लिमिटेशन कानून हटा दिया है। नूर ने कहा कि वक्फ बोर्ड कानून संशोधित बिल का मुस्लिम समुदाय पूरा विरोध करेगा। अमृतसर में भी आंदोलन शुरू करने के लिए रुपरेखा तैयार की जा रही है। फिलहाल शहर की 22 और देहात की 15 मस्जिदों पर काले झंडे फहराए गए हैं। शुरू किए गए आंदोलन के तहत प्रत्येक शुक्रवार को जुमे की नमाज बाजुओं पर काली पटिट्या बांध कर अदा की जा रही है । अगर केंद्र ने संशोधन बिल वापस न लिया तो देश भर में आंदोलन शुरु किया जाएगा।


