भास्कर न्यूज| बिरकोनी/ महासमुंद ग्राम पंचायत बिरकोनी में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा का बुधवार को छठवां दिन था। कथावाचक आचार्य पं. दीपक शर्मा ने कहा कि हम जब तक अपने मन के रावण यानी अहंकार को नहीं मार देते, तब तक ईश्वर के सच्चे स्वरूप को नहीं जान पाएंगे। इस मौके पर उन्होंने श्रीकृष्ण बाल लीला, कंस वध, मुचुकुंद उद्धार, रुक्मणि मंगल विवाह आदि प्रसंगों का रसपान कराया। आचार्य ने कहा कि संसार में जब-जब पाप बढ़ेगा, तब-तब श्रीकृष्ण के रूप में भगवान प्रकट होकर संसार का उद्धार करेगे। श्रीकृष्ण की हर लीला में एक गुढ़ संदेश है। गोवर्धन पर्वत, कंस वध और यशोदा माता द्वारा श्रीकृष्ण दर्शन जैसे प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ये घटनाएं हमें सिखाती हैं कि अहंकार और नकारात्मकता का नाश किए बिना ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं है। इस प्रसंगों पर श्रद्धालुओं ने हरे राम-हरे कृष्ण और गोविंद बोलो, हरि गोपाल बोलो… जैसे भजनों पर झूमते हुए भक्ति का आनंद लिया। मुचुकुंद का श्रीकृष्ण से भेंट और उद्धार की कथा में आचार्य ने बताया, राजा मुचुकुंद युद्ध नीति में निपुण थे। उन्होंने देवताओं की मदद के लिए असुरों से लंबा युद्ध लड़ा। मुचुकुंद ने श्रीकृष्ण को देखा और उनसे भक्ति का वरदान मांगा, न कि सांसारिक सुखों का। श्रीकृष्ण ने उन्हें हिंसा का पाप धोने तपस्या करने के निर्देश दिए। उनसे कहा कि वे अगले जन्म में ब्राह्मण बनेंगे। अंत में परमात्मा को प्राप्त करेंगे। इस दौरान आयोजक चंदन कुमार चंद्राकर, व्यास चंद्राकर, बलराम पटेक, घनश्याम चंद्राकर, बेदुल चंद्राकर, डोलू साहू, ओमप्रकाश निर्मलकर, सीताराम निषाद, दौलत चंद्राकर, ओमप्रकाश पटेल, हेमराज चंद्राकर, लक्की चंद्राकर, सुरेश गोयल, मोनू सेन आदि मौजूद रहे। जब जीव में अभिमान आता है, तब भगवान से वह दूर हो जाता है। लेकिन, जब कोई भगवान के अनुराग के विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है, उसे दर्शन देते हैं। भगवान श्रीकृष्ण-रुखमणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ, लेकिन रुक्मणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया। कथा व्यास ने बताया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी हैं और वह नारायण से दूर रह ही नहीं सकती।


