मप्र में 800 हेक्टेयर जमीन खाली:सस्ती जमीन पर 2 साल बाद भी नहीं लगे उद्योग, अब जांच

सबसे ज्यादा इंदौर में ऐसी 230 और जबलपुर में 225 हेक्टेयर जमीन मप्र में उद्योग लगाने के लिए सस्ती दरों पर करीब 800 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई थी। लेकिन तीन साल बाद भी इन जमीनों पर कोई काम शुरू नहीं हुआ। खासकर उन जगहों पर जहां 10 हजार वर्गमीटर से ज्यादा जमीन दी गई है। ये जमीन न्यूनतम 25 रुपए प्रति वर्गमीटर के रेट पर सभी संभागों में बांटी गई है। इंदौर में सबसे ज्यादा 230 हेक्टेयर और जबलपुर में 225 हेक्टेयर जमीन है, जहां अभी तक उद्योग नहीं लगे। अब इस मामले की जांच शुरू हो गई है। जांच से यह पता चलेगा कि जमीन का सही उपयोग हुआ या नहीं। इससे प्रदेश में उद्योग विकास प्रभावित हो रहा है। इन्हें मिली जमीनें, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ा 1. आईटीसी फाइबर इनोवेशंस लिमिटेड को भोपाल में पेपर एंड पल्प उद्योग के लिए 64,750 वर्गमीटर जमीन आवंटित की गई थी।
2. बिस्पोक आर्ट स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड को भोपाल में पॉटरी, हैंडीक्राफ्ट, होम डेकोर, लाइटिंग एवं सेरेमिक उत्पाद के लिए 1,75,920 वर्गमीटर जमीन आवंटित हुई थी।
3. शार्क शोपोफेट्स
प्राइवेट लिमिटेड को रायसेन में शाॅप फिटिंग, होम एंड फर्नीचर एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर समेत अन्य प्रोजेक्ट के लिए करीब 1,82,200 वर्गमीटर जमीन दी गई थी।
4. मास बायोनोमिक्स प्राइवेट लिमिटेड को बायो
फ्यूल के लिए राजगढ़ में 1,75,402 वर्गमीटर जमीन आवंटित की गई थी।
5. बिजिम प्रोडक्ट को मिनरल प्रोसेसिंग के लिए 7500 वर्ग मीटर और इलेक्ट्रोमिनरल्स इंडिया को पेट्रोकोक के लिए 2500 वर्गमीटर जमीन इंडस्ट्रियल पार्क कटनी में आवंटित की गई थी।
6. क्लीयर स्कोप इंटरप्राइजेज, मनमोहन सिंह (मिनरल प्रोसेसिंग), एकेजी इंटर प्राइजेज को पेवर ब्लॉक्स के लिए व आर्यवीर इंडस्ट्रीज यूनिट-2 एवं मां नर्मदा इंडस्ट्रीज को उमरिया डुंगरिया फेस 1-2 में भूमि मिली है। (ये सभी जमीन आवंटन 2-3 साल पुराने हैं। उद्योग विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार।) नई जमीनें 75 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से
भोपाल में विकसित हो रहे नए औद्योगिक क्षेत्रों अगरिया और अचारपुरा में 25 रुपए वर्गमीटर में जमीनें ली गई थीं। दूसरी ओर सीहोर के पचामा में नई जमीनें अब 75 रुपए वर्गमीटर तक की दर से नीलाम हो रही हैं। यह राशि सरकारी खजाने में जमा हो रही है। जहां जमीन आवंटित की गई है, वहां से जानकारी मंगा रहे हैं
पिछले दो-तीन सालों में प्रदेश में जहां भी उद्योगों के लिए जमीन आवंटित की गई है, वहां से जानकारी मंगाई जा रही हैं। ये पूछा जा रहा है कि जिन्हें जमीन दी गई है उन्होंने काम शुरू किया या नहीं। दो साल का समय जमीन आवंटन की तारीख से काम शुरू करने के लिए दिया जाता है। 1 साल का अतिरिक्त समय भी देते हैं। -दिलीप कुमार, एमडी, उद्योग विभाग

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