सीहोर| जिला चिकित्सालय सीहोर में इलाज कराने आने वाले मरीजों को यह तक स्पष्ट नहीं हो पाता कि उनका उपचार कौन-सा डॉक्टर कर रहा है। अस्पताल में कई डॉक्टर न तो सफेद कोट पहनते हैं और न ही नाम का पहचान पत्र (नेम टैग), जिससे मरीजों और उनके परिजनों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। अस्पताल के केबिनों में बैठे जूनियर डॉक्टरों की भी कोई स्पष्ट पहचान नहीं होती। कई बार ऐसे लोग सामान्य कपड़ों में नजर आते हैं, जिनसे यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि वे डॉक्टर हैं, कंपाउंडर हैं या अन्य स्टाफ। इस स्थिति के कारण मरीजों को सही जानकारी नहीं मिल पाती। सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों की स्पष्ट पहचान बेहद जरूरी है। इसके लिए सफेद कोट और नेम टैग पहनना अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि मरीज जान सकें कि उनका उपचार किस डॉक्टर द्वारा किया जा रहा है। – प्रशांत राठौर।


