भास्कर न्यूज|भूली असर्फी अस्पताल में इलाजरत मरीज की मौत के बाद परिजनों ने रविवार को करीब सात घंटे तक जमकर हंगामा किया। आक्रोशित परिजनों ने चिकित्सक पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल में तोड़फोड़ भी की। हंगामे की सूचना पर धनबाद थाना की पुलिस पहुंची और आक्रोशित परिजनों को समझाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन परिजन मानने को तैयार नहीं थे। बाद में हंगामा बढ़ता देख वरीय अधिकारियों के निर्देश पर सरायढेला, बैंक मोड़, भूली व बरवाअड्डा थाना को भी अस्पताल भेजा गया। घंटों समझाने के बाद नियुक्त मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अस्पताल प्रबंधन व मृतक मरीज के परिजनों के बीच समझौता वार्ता हुई। वार्ता में बिल के रूप में बकाया तीन लाख रुपए माफ करने, परिजनों द्वारा पूर्व में जमा कराए डेढ़ लाख रुपए लौटाने व शव का अंतिम संस्कार कराने के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा 50 हजार बतौर सहायता राशि देने पर सहमति बनी। इसके बाद मामला शांत हुआ और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। धनबाद | बिनोद बिहार चौक के समीप एक निजी अस्पताल में गिरिडीह गांडेय िनवासी 26 वर्षीय सुधीर कुमार वर्मा की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके बाद परिजनों द्वारा अस्पताल का बिल नहीं देने पर शव को बंधक बना लिया गया। परिजनों ने बताया कि चार लाख के बिल में 3 लाख से ऊपर जमा िकया। लगभग एक लाख नहीं होने पर डेड बॉडी देने से इंकार िकया गया। मृतक के जीजा सुशांत कुमार वर्मा ने बताया कि मृतक सुधीर कुमार वर्मा ठेला लगाते थे। उनकी एक छोटी बेटी है। रोड से 20 मीटर अंदर ठेला लगाए थे, तभी एम्बुलेंस ने धक्का मार दिया। गांडेय हॉस्पिटल से धनबाद रेफर िकया गया। जहां इलाज के दौरान आज सुबह मौत हो गई। बाद में अस्पताल प्रबंधन के निर्देश पर शव परिजनों को सौंपा गया। 28 जनवरी को घायल के पैर की हुई थी सर्जरी सिंदरी बस्ती निवासी 52 वर्षीय दिलीप कुमार मंडल 27 जनवरी को झरिया-गोविंदपुर रोड स्थित खालसा मोड़ के समीप हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें चासनाला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से चिकित्सकों ने एसएनएनएमसीएच धनबाद भेज दिया। वहां से भी चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए असर्फी अस्पताल रेफर िकया था। 28 जनवरी को दिलीप के पैर की सर्जरी हुई थी। असर्फी अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार रात करीब ढाई बजे उनकी मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने के कारण मौत का आरोप लगा हंगामा िकया। दिलीप सिंदरी के ही एक रंग फैक्ट्री में मुंशी का काम करते थे। गंभीर अवस्था में मरीज भर्ती हुआ था। इसकी जानकारी परिजनों को पहले ही दी गई थी। परिजनों ने संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किया था। अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप पूरी तरह गलत है। परिजनों की आर्थिक स्थिति का पता चलने पर बिल माफ कर सहायता राशि दी गई है। डॉ. स्वाति, को-ऑर्डिनेटर, असर्फी अस्पताल


