धनबाद के जालान अस्पताल में एक कैंसर पीड़ित मरीज को इंजेक्शन देने में देरी होने पर परिजनों ने जमकर हंगामा कर दिया। अंतिम चरण के कैंसर से पीड़ित 67 वर्षीय निर्दोष जैन, वेंटिलेटर पर हैं। उन्हें इंजेक्शन लगाने को लेकर परिजनों और अस्पताल प्रबंधन के बीच तनाव की स्थिति बन गई। विवाद तब शुरू हुआ, जब अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों द्वारा बाहर से लाए गए इंजेक्शन को लेने से मना कर दिया। अस्पताल का तर्क था कि यह उनकी नीति के विरुद्ध है। परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन की व्यवस्था में हुई देरी से मरीज की स्थिति और नाजुक हो गई। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि मरीज पहले से ही गंभीर स्थिति में था और कैंसर के अंतिम चरण में है। मामला इतना बिगड़ गया कि स्थानीय पुलिस सूचना देनी पड़ी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर स्थिति को नियंत्रित किया। अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि उनके यहां दो फार्मेसी हैं और बाहर की दवाएं न लेने का नियम शुरू से ही है। मरीज की ऑल रेडी कंडीशन क्रिटिकल
इधर अस्पताल प्रबंधन ने भी इस मामले में अपनी सफाई दी। डॉ. ए.एम.रॉय ने बताया कि अस्पताल का शुरू से ही यह रूल रहा कि बाहरी दवाएं नहीं लेनी है। अस्पताल के भीतर ही दो फार्मेसी हैं और जब डॉक्टर ने दवा लिखी, उसके फौरन बाद ही दवा की उपलब्धता में स्टाफ लग गए थे। डॉक्टर ने सुबह 10:45 बजे इंजेक्शन मांगी थी। महज डेढ़ घंटे के भीतर ही वह इंजेक्शन उपलब्ध करा दिया गया। इंजेक्शन की उपलब्धता में देरी के कारण मरीज की स्थिति बिगड़ी यह भी बेबुनियाद बातें हैं। मरीज की ऑल रेडी कंडीशन क्रिटिकल है। मरीज कैंसर के लास्ट स्टेज पर है।


