भास्कर न्यूज|गिरिडीह गिरिडीह के पहले मल्टी स्पेशलिटी बैंक्वेट में पहला मेडिकल सेमिनार आयोजित हुआ। इसमें कोलकाता से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने किडनी रोग और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में हुए नए चिकित्सा विकास की जानकारी दी। नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि क्रॉनिक किडनी डिजीज देश में तेजी से बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण अनियंत्रित ब्लड शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, अधिक नमक और खराब जीवनशैली है। उन्होंने नई दवाओं और डाइट प्लान से इलाज के तरीकों की जानकारी दी। डॉ. कुमार ने किडनी ट्रांसप्लांट से पहले और बाद की देखभाल के नए दृष्टिकोण भी बताए। सेमिनार में बताया गया कि मर्सी हॉस्पिटल की अत्याधुनिक डायलिसिस यूनिट शुरू हो चुकी है। यह यूनिट डॉ. सुनील कुमार के मार्गदर्शन में बनी है। यह गिरिडीह और आसपास के मरीजों को सस्ती और अच्छी डायलिसिस सेवा देगी। जनरल और लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. फोरकान बाबू शेख ने लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की नई तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक से अब जटिल सर्जरी भी आसान हो गई है। डॉ. फोरकान अब तक 7000 से ज्यादा पित्ताशय और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कर चुके हैं। मर्सी हॉस्पिटल में अनुभवी विशेषज्ञ लगातार सेवाएं देते रहेंगे। हॉस्पिटल के सीईओ डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि दो महीने में इमरजेंसी आईसीयू और इनडोर सेवाएं भी शुरू होंगी। इससे मरीजों को एक ही जगह पर बेहतर इलाज मिलेगा। सेमिनार में गिरिडीह के कई डॉक्टरों और मरीजों ने हिस्सा लिया। उन्होंने विशेषज्ञों से सवाल पूछे और जानकारी ली। मर्सी हॉस्पिटल के निदेशक मंडल रंजीत कुमार गौड़, नीरज शाहाबादी, विश्वजीत सिंह गुड्डू, साहिल सालूजा आदि मौजूद थे।


