झारखंड के विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएशन स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) से पढ़ाई हो रही है। लेकिन, अबतक मल्टीपल एग्जिट-एंट्री और एकेडमिक क्रेडिट बैंक (एबीसी) का लाभ छात्रों को नहीं मिल रहा है। राजभवन में गुरुवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की अध्यक्षता में एनईपी-2020 के क्रियान्वयन और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आयोजित कुलपतियों के साथ परिचर्चा के दौरान यह बातें सामने आई। गवर्नर ने सभी यूनिवर्सिटी की कुलपतियों से कहा कि मल्टीपल एग्जिट-एंट्री और एकेडमिक क्रेडिट बैंक का ऐसा सिस्टम डेवलप करें कि छात्रों का इसका लाभ मिल सके। यूनिवर्सिटी के लिए अधिकांश विश्वविद्यालयों में शिक्षकों का टॉस्क फोर्स का गठन किया था। -शेष पेज 11 पर जानिए… क्या है एबीसी व मल्टी एंट्री व यूनिवर्सिटी एकेडमिक क्रेडिट बैंक एक डिजिटल एकाउंट है। इसमें छात्रों की पढ़ाई के दौरान अर्जित क्रेडिट जमा होता है। एक से दूसरे विवि में ट्रांसफर का आधार क्रेडिट होता है। वहीं, मल्टीपल एंट्री और एक्जिट सिस्टम पढ़ाई के दौरान सेमेस्टर में प्रवेश और बाहर निकलने की अनुमति देता है। इसमें बीच सेशन में पढ़ाई छोड़ने और बाद में दोबारा शुरू करने की स्वतंत्रता भी है। भारतीय केंद्र की स्थापना सभी विवि में हो: गवर्नर ने कहा कि एनईपी के कार्यान्वयन के लिए सभी विवि में भारतीय केंद्र जरूरी है। एनईपी केवल शिक्षा सुधार का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत को ज्ञान की महाशक्ति बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यदि सभी कुलपति साथ दें, तो झारखंड उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक अनुकरणीय राज्य बन सकता है।


