मसीहियों ने की प्रार्थना… आगमन काल जीवन में नई रोशनी और आशा लाए

ईसाई समुदाय का आगमन काल रविवार से शुरू हो गया। इस अवसर पर सभी चर्चों में विशेष प्रार्थना हुई। पुरुलिया रोड स्थित संत मरिया महागिरजाघर में विशेष प्रार्थना हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में विश्वासी मौजूद रहे। मसीहियों ने प्रार्थना की कि आगमन काल जीवन में नई रोशनी और आशा लाए। पुरोहितों ने येसु के दुनिया में आने का मर्म समझाया। अपने आप को येसु के आगमन के लिए तैयार करने को कहा। मेन रोड स्थित क्राइस्ट चर्च में आगमन काल का पहला रविवार रहा। विश्वासियों ने विशेष आराधना में हिस्सा लिया। सुबह 10:30 बजे की आराधना का संचालन रेव्ह अनूप जॉली भेंगरा ने किया, जबकि उपदेश रेव्ह शशिरीता कंडुलना ने किया। रेव्ह शशिरीता ने अपने उपदेश में कहा कि आज हम आगमन के पावन काल में है। हम बालक येसु और उनके आगमन पर मनन कर रहे हैं। येसु नम्र होकर हमें हमारे पापों से क्षमा दिलाने के लिए इस दुनिया में आए थे। हमें अब उनके दूसरे आगमन के लिए खुद को तैयार करना है। आराधना में उमड़े मसीही इधर, बहुबाजार स्थित संत पॉल्स कैथेड्रल में विशेष आराधना हुई। सुबह 6:15 बजे की आराधना के दौरान रेव्ह जोलजस कुजूर ने उपदेश के दौरान आगमन काल और उनसे जुड़ी तैयारियों के बारे में बताया। यह काल प्रभु येसु के जन्म उत्सव को मनाने और उस पर विचार करने का है। उन्होंने कहा कि प्रभु का दूसरा आगमन न्याय और शांति के लिए होगा। इस अवसर पर रेव्ह जस्टिन भुइंया सहित अन्य पुरोहितों ने आराधना में सहयोग किया। आराधना के दौरान बड़ी संख्या में विश्वासी उपस्थित थे। सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें युवा: शिल्पी रांची | रांची महाधर्मप्रांत का युवा संघ और रांची येसु समाजी पुरोहितों ने संयुक्त रूप से रांची के युवाओं के लिए एक दिवसीय यूथ सेमिनार रखा गया। संत जेवियर्स स्कूल डोरंडा में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य करियर गाइडेंस था। मुख्य अतिथि कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि हार के बारे नहीं बल्कि सफल होने के बारे में सोचे। हम सफल होंगे तो हमारा भविष्य भी अच्छा होगा। हमेशा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े। मुख्य वक्ता नमन प्रियेश लकड़ा ने कैसे युवा अपने जीवन में सफल बने, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझे। विशिष्ट अतिथि रंजिता हेमरोम ने कैसे हम अपने जीवन में सही निर्णय लें इसके बारे में बताया। कार्यक्रम में महाधर्मप्रांतीय युवा निर्देशक फ़ादर दीपक किंडो, संत जेवियर स्कूल प्रिंसिपल फादर फूलदेव सोरेंग, फादर रवि भूषण खेस, यूथ कॉर्डिनेटर कुलदीप तिर्की, अध्यक्ष एलेक्स, विनीत, उत्तम, अनिमा टोप्पो, दीपक लकड़ा व अन्य लोग मौजूद थे। आंतरिक जागृति और आध्यात्मिक नवीनीकरण का समय है आगमनकाल रांची| एडवेंट, ईसाई परंपरा में क्रिसमस पूर्व चार सप्ताह का पवित्र काल है। जिसका अर्थ है “आगमन”- अर्थात प्रभु येसु मसीह के आगमन की तैयारी। यह अवधि आमतौर पर नवंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर क्रिसमस से पहले वाले चौथे सप्ताह तक चलती है। आगमन काल के प्रथम दिन से पूजन-पद्धति का नया वर्ष भी शुरू हो जाता है। एडवेंट केवल त्योहारों की शुरुआत नहीं, बल्कि यह आंतरिक जागृति और आध्यात्मिक नवीनीकरण का समय होता है। इस पवित्र काल में मसीही समुदाय प्रार्थना, उपवास, पापस्वीकार, मिस्सा पूजा में भाग लेना, आत्मचिंतन और परोपकार कार्य के माध्यम से अपने जीवन को प्रभु के स्वागत योग्य बनाने का संकल्प लेते हैं। एडवेंट हमें यह याद दिलाता है कि जैसे पुराने नियम में लोगों ने मसीहा के आने की आशा की, वैसे ही आज के विश्वासियों को भी प्रभु के पुनरागमन के लिए सदैव तैयार रहने का आह्वान है। भागदौड़ भरी दुनिया में एडवेंट का संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें ठहरकर ईश्वर की उपस्थिति को महसूस करने और बेहतर इंसान बनने का अवसर प्रदान करता है। आगमन का असली अर्थ जीवन को प्रकाश, आशा और प्रेम से भरकर प्रभु के आगमन के लिए तैयार करना है। ना की बाहरी दिखावा। यह समय विश्वासियों को इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देती हैं। फादर प्रफुल बड़ा संत अल्बर्टस कॉलेज, रांची पुरोहितों ने येसु के दुनिया में आने का मर्म समझाया

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