मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी के इलाज के लिए चाचा नेहरू चिकित्सालय में बड़ा सेंटर शुरू होगा। दरअसल, इस बीमारी से पीड़ितों के कुछ पालक शनिवार को प्रशासनिक संकुल पहुंचे। पालकों ने कलेक्टर आशीष सिंह से कहा कि मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी के उपचार के लिए इंदौर में सेंटर शुरू किया जाए। अभी इस बीमारी की थैरेपी के लिए बेंगलुरु, केरल या दिल्ली जाना पड़ता है। कलेक्टर ने सामाजिक न्याय विभाग को निर्देशित किया कि जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में प्रारंभिक स्तर पर थैरेपी सेंटर शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि चाचा नेहरू चिकित्सालय में चर्चा करके शीघ्र ही बड़ा सेंटर शुरू कराया जाएगा। पालकों में अरुण कुमार मिश्रा, विनोद वर्मा, राजेश पाटीदार, दीपक द्विवेदी, समाजसेवी सुनील न्याति और सामाजिक न्याय विभाग से शैलेंद्र सोलंकी उपस्थित थे। गंभीर बीमारी, मांसपेशी प्रभावित हो जाती हैं
मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी बच्चों में होने वाली एक गंभीर और दुर्लभ अनुवांशिक विकार है, जो मांसपेशियों को प्रभावित करता है। यह विकार मांसपेशियों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे मांसपेशियों की ताकत और कार्यक्षमता कम हो जाती है। पालकों ने मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी के लक्षणों के बारे में बताया और उससे बचाव के उपाय भी बताए। इससे मांसपेशियों में कमजोरी, सिकुड़न, चलने और खड़े होने में कठिनाई, सांस लेने में कठिनाई और हृदय संबंधी समस्याएं होती हैं।
कई तरह की होती है मस्क्यूलर डिस्ट्रॉफी
डचेन मांसपेशी डिस्ट्रॉफी (डीएमडी), बेकेर मांसपेशी डिस्ट्रॉफी (बीएमडी), लिम्ब-गिर्डल मांसपेशी डिस्ट्रॉफी (एलजीएमडी), फेसियोस्कैपुलोहुमरल मांसपेशी डिस्ट्रॉफी (एफएसएचडी) आदि।


