अमृतसर| प्रो. दरबारी लाल ने 10 अप्रैल 1919 की महत्वपूर्ण घटना को याद करते हुए रॉलेट एक्ट के विरोध और उसके बाद हुए हिंसक टकराव का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी के आह्वान पर 6 अप्रैल को शांतिपूर्ण हड़ताल के बाद, 9 अप्रैल को राम नवमी पर हिंदू, सिख और मुस्लिमों ने मिलकर शोभायात्रा निकाली, जिसका नेतृत्व डॉ. हाफिज मोहम्मद बशीर कर रहे थे। इस एकता से घबराकर अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर ने डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल को 10 अप्रैल की सुबह गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी की खबर फैलते ही लोग अपने नेताओं की रिहाई की मांग करने डिप्टी कमिश्नर के पास जा रहे थे, तभी पुल पर पुलिस ने गोली चला दी, जिसमें 22 नागरिक मारे गए। मृतकों के शव मस्जिद खैरूद्दीन में रखे गए थे। प्रो. दरबारी लाल ने पंजाब सरकार से इस ऐतिहासिक मस्जिद को विरासत का दर्जा देने और इसके सौंदर्यीकरण के लिए दस लाख रुपए की राशि आवंटित करने की मांग की है।


