महाकाल मंदिर गर्भगृह में प्रवेश का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा:सांसद-महापौर सहित कई लोग गर्भगृह में प्रवेश की कर चुके हैं वकालत

ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में नेताओं और वीआईपी को प्रवेश दिए जाने का मामला हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब गर्भगृह में वीआईपी और रसूखदार लोगों को प्रवेश मिल रहा है, तो आम श्रद्धालुओं को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है। आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश देने की मांग को लेकर इंदौर के एडवोकेट चर्चित शास्त्री ने एडवोकेट विष्णु जैन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। याचिका में कहा गया है कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु महाकाल मंदिर दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें गर्भगृह के बाहर से ही दर्शन करने पड़ते हैं, जबकि नेता और वीआईपी बिना किसी रोक-टोक के गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इसे समानता और धार्मिक अधिकारों के विरुद्ध बताया गया है। ढाई साल से बंद है गर्भगृह में प्रवेश दरअसल, 4 जुलाई 2023 को श्रावण मास में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति ने 11 सितंबर 2023 तक के लिए गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया था। उस समय समिति ने कहा था कि सावन समाप्त होते ही गर्भगृह खोल दिया जाएगा, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह व्यवस्था बहाल नहीं हुई है। महाकाल लोक के निर्माण से पहले मंदिर में प्रतिदिन 20 से 30 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, लेकिन अक्टूबर 2022 में महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या चार गुना बढ़ गई। वर्तमान में यह संख्या रोजाना डेढ़ से दो लाख तक पहुंच रही है। पहले शुल्क लेकर मिलता था गर्भगृह में प्रवेश 4 जुलाई 2023 से पहले महाकाल मंदिर में 1500 रुपए की रसीद कटवाकर श्रद्धालुओं को गर्भगृह में अभिषेक-पूजन की अनुमति दी जाती थी। फिलहाल श्रद्धालुओं को गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम और नंदी हॉल से ही दर्शन करवाए जा रहे हैं। गर्भगृह में आम भक्तों का प्रवेश पूरी तरह बंद है। जनप्रतिनिधि भी उठा चुके हैं आवाज गर्भगृह खोलने की मांग को लेकर उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया पहले ही आवाज उठा चुके हैं। उन्होंने इस संबंध में पत्र जारी किया था और सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री मोहन यादव के समक्ष भी यह मांग रखी थी। इसके अलावा दो सप्ताह पहले उज्जैन के महापौर ने भी महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह से दर्शन कराने की मांग की थी। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… 1. महाकाल गर्भगृह में आम भक्तों को भी अनुमति मिले उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में आम श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में प्रवेश पर रोक और नेताओं, वीआईपी और प्रभावशाली लोगों के विशेष प्रवेश को लेकर मामला अब इंदौर हाईकोर्ट पहुंच गया है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि दूर-दराज से आने वाले लाखों भक्त बाहर से ही बाबा महाकाल के दर्शन करने को मजबूर हैं, जबकि नेता और वीआईपी आसानी से गर्भगृह में प्रवेश पा रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर… 2. विधायक के बेटे ने महाकाल मंदिर के गर्भगृह में जबरन प्रवेश किया उज्जैन के महाकाल मंदिर में एक विवादित घटना में, इंदौर-1 से भाजपा विधायक गोलू शुक्ला और उनके बेटे रुद्रक्ष ने मंदिर के नियमों का उल्लंघन करते हुए जबरन गर्भगृह में प्रवेश किया। प्रवेश की अनुमति नहीं थी, और जब मंदिर के एक कर्मचारी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो रुद्रक्ष ने कथित तौर पर उसे धमकी दी। पढ़ें पूरी खबर…

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