प्रयागराज महाकुंभ क्षेत्र में सनातन धर्म की रक्षा और धर्मस्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। रविवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की उपस्थिति में सनातन संरक्षण परिषद का गठन किया गया। यह निर्णय परमधर्म संसद के सत्र में लिया गया। जहां धर्म के संरक्षण और पवित्रता के लिए प्रस्ताव पारित किए गए। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- हिन्दू धर्म की नींव मठों- मंदिरों के साथ गोशालाओं और गुरुकुलों से जुड़ी है। इनकी पवित्रता और प्रबंधन को हिन्दू समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा- धर्मस्थलों पर गैर धार्मिक और विधर्मी व्यक्तियों की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा- धर्मस्थलों को सरकार हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए। जिससे उनका सही प्रबंधन हो सके। धार्मिक आस्था वाले ही करें मंदिर की देखरेख
परमधर्म संसद-1008 में शंकराचार्य ने कहा- कश्मीर से आई बहन बताया कि हमारे मंदिरों में मुस्लिम पुजारी नियुक्त है। हमारा धर्म इसलिए कमजोर हो गया है क्योंकि हम अपने मंदिरों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा-मौजूदा समय में कई सरकारी अधिकारी मंदिरों को देख रहे है। जबकि इन्हें कोई धार्मिक जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा- अगर जिनकी आस्था धार्मिक नहीं है उसको मंदिर की व्यवस्था और मंदिर के अंदर जाने का कोई अधिकार नहीं है। सभी मंदिरों में एकांतर दृष्टि रहे
शंकराचार्य ने मंच से कहा-हमारे देश में कुछ ऐसे मंदिर है जहां बहुत सी भीड़ लगी है और बहुत से मंदिर ऐसे हैं जहां एक लोग भी नहीं जा रहे हैं। उन्होंने कहा यह असंतुलन धर्म के लिए ठीक नहीं है। इसलिए एकांतर दृष्टि की आवश्यकता है। उन्होंने कहा- हर मंदिर में पूजा-आरती सुनिश्चित होनी चाहिए। जिन मंदिरों में संसाधन है। वहां पवित्रता का वातावरण बनाए रखना चाहिए। …………………………. ये खबर भी पढ़ें… LIVE महाकुंभ का पहला स्नान, 60 लाख श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई:20 देशों से आए भक्त, संगम तक 12 किमी पैदल यात्रा महाकुंभ का शुभारंभ हो चुका है। पौष पूर्णिमा पर आज पहला स्नान है। सुबह साढ़े 9 बजे तक 60 लाख श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं। आज 1 करोड़ भक्तों के पहुंचने का अनुमान है। भक्तों पर 20 क्विंटल फूलों की वर्षा की जाएगी। महाकुंभ 144 साल में दुर्लभ खगोलीय संयोग में हो रहा है। पढ़िए पूरी खबर


