शिवपुरी जिले की बदरवास जनपद पंचायत के ग्राम विजयपुरा के लगभग 80 आदिवासी मजदूर, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से रविवार को सकुशल अपने गांव लौट आए। इन मजदूरों को वहां बंधक बनाकर रखा गया था। उनकी सुरक्षित वापसी के बाद पूरे गांव में राहत का माहौल है। वापस लौटे मजदूरों ने बताया कि उन्हें इंदौर में काम दिलाने का झांसा देकर महाराष्ट्र ले जाया गया था। वहां उन्हें एक फार्म पर बंधक जैसी स्थिति में रखा गया। मजदूरों के अनुसार, उनसे सुबह 6 बजे से रात करीब 8 बजे तक जबरन काम कराया जाता था। काम के दौरान लाठियों के बल पर उनकी निगरानी की जाती थी। जरा सी बात पर उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं। महिलाओं और बच्चों को भी उसी फार्म पर रहने के लिए मजबूर किया गया था। आरोप- मजदूरी का एक भी पैसा नहीं दिया
मजदूरों का आरोप है कि उन्हें अब तक मजदूरी का एक भी पैसा नहीं दिया गया। उनके मोबाइल फोन भी छीन लिए गए थे, ताकि वे आपस में या अपने परिजनों से संपर्क न कर सकें। उन्हें डर के माहौल में एक-दूसरे से बात करने की भी अनुमति नहीं थी, जिससे उनकी जान को खतरा बना हुआ था। मामले की जानकारी मिलते ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तत्काल संज्ञान लिया और मजदूरों की वापसी के प्रयास शुरू कर दिए। इसके साथ ही रन्नौद थाना प्रभारी ने महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क कर सहयोग मांगा। दोनों राज्यों की पुलिस के समन्वय से सभी मजदूरों को वहां से मुक्त कराया गया और सुरक्षित रूप से मध्य प्रदेश स्थित उनके गांव विजयपुरा भेजा गया। कार्रवाई में कोलारस विधायक महेंद्र सिंह यादव, योगेंद्र रघुवंशी, अरविंद दांगी और रन्नौद थाना प्रभारी चौहान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। गांव लौटने के बाद मजदूरों और उनके परिजनों ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधायक महेंद्र सिंह यादव, योगेंद्र रघुवंशी, अरविंद दांगी और रन्नौद पुलिस का आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने एक वीडियो संदेश जारी कर केंद्रीय मंत्री सिंधिया से उनके आगामी दौरे के दौरान ग्राम विजयपुरा आने का आग्रह भी किया है।


