मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने किसानों की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दाम पर खरीदे जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और मंडी बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अन्नदाता किसान संगठन ने इस कानूनी कदम को किसानों के अधिकारों की एक बड़ी जीत बताया है। कोर्ट के पुराने आदेश का पालन न करने का आरोप रविवार को अन्नदाता किसान संगठन के अध्यक्ष मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने बताया कि हाईकोर्ट ने साल 2018 में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि मंडियों में नीलामी एमएसपी से कम कीमत पर शुरू नहीं हो सकती। अदालत ने तब अधिकारियों को किसानों की शिकायतों का 90 दिनों में निपटारा करने का निर्देश दिया था। आरोप है कि सालों बीत जाने के बाद भी इस आदेश को जमीन पर लागू नहीं किया गया और किसानों का शोषण जारी रहा। किसानों के हितों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प संगठन का कहना है कि प्रशासन और मंडी बोर्ड की अनदेखी के कारण ही उन्हें दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। 17 दिसंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने शासन से इस लापरवाही पर सफाई मांगी है। किसान नेताओं के अनुसार, यह लड़ाई पूरे प्रदेश के किसानों के सम्मान की है। उनका कहना है कि जब तक दोषी अधिकारियों और व्यापारियों पर कार्रवाई नहीं होती और एमएसपी का पूरा लाभ नहीं मिलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। मंडी व्यवस्था में सुधार की मांग किसान संगठन ने मांग की है कि मंडी व्यवस्था को व्यापारियों के बजाय किसानों के हित में काम करना चाहिए। उनका कहना है कि कोर्ट की इस न्यायिक सक्रियता से उन अधिकारियों पर दबाव बनेगा जो नियम होने के बावजूद किसानों को सही दाम दिलाने में लापरवाही बरत रहे हैं। इस फैसले से प्रदेश भर के किसानों में न्याय की उम्मीद जगी है।


