छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धान न बेच पाने से किसान आक्रोशित हैं। प्राथमिक कृषि साख समिति राजाडेरा के अंतर्गत आने वाले किसानों ने पिथौरा तहसील कार्यालय में धरना दिया। वहीं, प्राथमिक कृषि साख समिति तेंदूकोना के किसानों ने बागबाहरा-पिथौरा मार्ग पर चक्काजाम कर धान खरीदी की मांग की। अधिकारियों ने इस मामले को सरकारी स्तर का बताते हुए अपनी असमर्थता जताई है। देर शाम तक किसान धरने पर डटे रहे। राज्य सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। 77 दिनों की खरीदी अवधि में जिले के 1,48,418 किसानों से कुल 10,00,187.16 मीट्रिक टन धान खरीदा गया। धान खरीदी में महासमुंद जिला प्रदेश में अव्वल रहा। हालांकि, इस अवधि में जिले के 11,700 किसान ऐसे हैं जिनका धान नहीं बिक पाया। इन्हीं किसानों का आक्रोश अब सड़कों पर उतर आया है। धान न बिकने पर नाराज किसान धरने पर बैठे आज प्राथमिक कृषि साख समिति मर्यादित तेंदूकोना के अंतर्गत आने वाले 50 किसान, अपने धान को समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए सोसाइटी पहुंचे। लेकिन धान न बिकने पर किसान नाराज हो गए और पिथौरा-बागबाहरा मार्ग पर धरने पर बैठ गए। किसान हेमंत साहू, धनजय साहू, आकाश साहू, भुवनेश्वर साहू ने बताया कि 50 किसानों का कुल 6201.20 क्विंटल धान बिक्री के लिए सत्यापन हो चुका था, लेकिन उनका टोकन काटा नहीं गया। उन्होंने 16 जनवरी को धान खरीदी के लिए आवेदन दिया था। 30 जनवरी को तेंदूकोना समिति में अनुविभागीय अधिकारी ने धान खरीदी का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। किसानों ने कहा कि धान न बिकने की वजह से उनका कर्ज अभी तक बकाया है और उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनका धान नहीं बिका, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। पिथौरा तहसील कार्यालय में धरना
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी न होने से आक्रोशित किसान, जो प्राथमिक कृषि साख समिति राजाडेरा के हैं, अपने धान को ट्रैक्टर में लादकर पिथौरा तहसील कार्यालय पहुंचे। समिति के अंतर्गत सात गांव के लगभग 90 किसानों का धान अभी तक नहीं बिका है। किसानों ने कहा कि जब तक उनका धान खरीदी का मामला सुलझता नहीं, वे धरने पर बैठे रहेंगे। जानिए महासमुंद में कितनी हुई धान खरीदी इस वर्ष समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का अनुमानित लक्ष्य 11,93,570.00 मीट्रिक टन निर्धारित किया गया था। 15 नवंबर से 31 जनवरी के बीच (77 दिन) जिले के 182 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से कुल 10,00,187.16 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई, जो प्रदेश में सर्वाधिक थी। जिले में कुल 1,60,118 किसान पंजीकृत थे, जिनमें से 1,48,418 किसानों (92.69 प्रतिशत) ने खरीदी अवधि के दौरान धान बेचा। यह राज्य के औसत 91.22 प्रतिशत से अधिक रहा। इसके बावजूद, 11,700 किसान अपना धान समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाए।


