रतलाम महिला अपराधों की जांच के दौरान पुलिसकर्मियों को क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए, इस विषय पर रतलाम पुलिस कंट्रोल रूम में विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसमें रतलाम रेंज के तीन जिलों रतलाम, मंदसौर और नीमच से पुलिसकर्मियों ने भाग लिया। रतलाम रेंज डीआईजी निमिष अग्रवाल और एसपी अमित कुमार ने पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण का उद्देश्य बताया। उन्होंने कहा कि महिला अपराधों की विवेचना में यदि एफआईआर में उचित धाराएं न लगाई जाएं या जांच में कमी रह जाए, तो अभियोजन के दौरान आरोपियों को इसका लाभ मिलता है और वे कोर्ट से बरी हो जाते हैं। विवेचना में बरतने की सावधानियों पर चर्चा ट्रेनिंग में डीआईजी ने कहा कि प्रत्येक अधिकारी को जांच के दौरान कानूनी बारीकियों, साक्ष्य संरक्षण, गवाहों के परीक्षण और दस्तावेजों की प्रक्रिया की पूरी जानकारी होनी चाहिए। इस मौके पर एएसपी राकेश खाखा, डीएसपी अनिशा जैन, आरआई मोहन भर्रावत और सूबेदार मोनिका सिंह ठाकुर मौजूद रहे। तीनों जिलों से 24 अधिकारी हुए शामिल रतलाम, मंदसौर और नीमच से 2 सब इंस्पेक्टर, 2 एएसआई और 20 हेड कॉन्स्टेबल समेत कुल 24 विवेचना अधिकारी ट्रेनिंग में शामिल हुए। प्रशिक्षण के अंत में उनकी समझ का मूल्यांकन करने के लिए टेस्ट लिया गया। इसमें सब इंस्पेक्टर शेरसिंह पंवार (मंदसौर) प्रथम और हेड कॉन्स्टेबल लालसिंह (नीमच) द्वितीय स्थान पर रहे। पांच विषयों पर दी गई जानकारी ट्रेनिंग में विशेषज्ञों ने पांच प्रमुख विषयों पर विस्तार से जानकारी दी- 1. सायबर अपराधों की जांच
सायबर सेल प्रभारी मनमोहन शर्मा और उनकी टीम ने मोबाइल, सोशल मीडिया और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे अपराधों की जांच में उपयोगी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। साथ ही CEIR पोर्टल, CDR विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया समझाई। 2. नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधान
सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के नए प्रावधानों पर चर्चा की। उन्होंने अपराध पंजीयन, गिरफ्तारी और साक्ष्य संकलन की नई प्रक्रिया बताई। 3. महिला संबंधी अपराधों की विवेचना
डीएसपी अजय सारवान ने दहेज, घरेलू हिंसा, लैंगिक उत्पीड़न और पॉक्सो एक्ट जैसे मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी सटीकता की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने महिला पीड़िताओं के बयान, परामर्श और मेडिकल साक्ष्य संकलन की सावधानियों की जानकारी दी। 4. फॉरेंसिक साक्ष्य की भूमिका
एफएसएल अधिकारी डॉ. अतुल मित्तल ने बताया कि भौतिक, जैविक और डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण और वैज्ञानिक विश्लेषण कैसे अभियोजन को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट से न्यायालय में साक्ष्य की विश्वसनीयता बढ़ती है। 5. एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत विवेचना
जिला अभियोजन अधिकारी गोल्डन रॉय ने एनडीपीएस एक्ट के तहत तलाशी, जब्ती, सीलिंग और नमूना परीक्षण की कानूनी प्रक्रिया बताई। उन्होंने न्यायालय में दस्तावेजों और गवाहों की भूमिका पर विशेष जोर दिया। डीआईजी निमिष अग्रवाल ने कहा “महिला अपराधों की जांच में हर छोटी चूक आरोपी के पक्ष में जाती है। इसलिए विवेचना में सटीकता, संवेदनशीलता और कानूनी समझ बेहद जरूरी है।”


