सियासत में नेताओं के दिन हमेशा एक जैसे नहीं रहते। किसी जमाने में राजधानी की सियासत में दबदबा रखने वाले एक नेताजी सरकार के उग्र तेवर वाले मंत्री के पास कोई तबादले की फरियाद लेकर पहुंचे। नेताजी के सिफारिश करते ही मंत्री किसी बात पर उखड़ गए। दोनों के बीच जमकर नोकझोंक हो गई। अब तबादला सीजन में इस तरह की बातें छिपती थोड़ी हैं। कई लोगों को इसकी भनक लग गई। सुना है मंत्री ने भी खूब खरी-खोटी सुनाई । कहां तो नेताजी यह उम्मीद लेकर गए थे कि राज होने की वजह से मान सम्मान मिलेगा। उल्टा बेइज्जत होकर आना पड़ा। आपत्तिजनक मैसेज, महिला इंजीनियर्स ने की शिकायतें
जनता से जुड़े एक महकमे के इंजीनियरिंग मुखिया की टॉप तक शिकायत चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ महिला इंजीनियर्स ने मुखिया की नामजद शिकायत की है, जिसमें उन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आपत्तिजनक मैसेज भेजने, कॉल करके फेवर मांगने की शिकायतें हैं। चर्चाओं के अनुसार इंजीनियरिंग महकमे के मुखिया ने महिला इंजीनियर्स को आपत्तिजनक मैसेज तो भेजे ही, बात नहीं मानने पर उन्हें तरह-तरह से परेशान करना शुरू कर दिया। अब टॉप पर हुई शिकायतों के बाद इंजीनियरिंग मुखिया डैमेज कंट्रोल में लगे हुए हैं। महिला नेता के जन्मदिन पर सियासी दिखावा क्यों नहीं चला
सियासत में जनाधार सबसे बड़ा पैमाना होता है। उसे मापने के आजकल बहुत से तरीके हैं। नेता जन आधार दिखाने के लिए जन्मदिन पर बड़े आयोजन करते हैं। शुभचिंतक पूरे शहर में बधाई संदेश लगते हैं। पिछले दिनों राजधानी की एक पदाधिकारी महिला नेता ने भी अपने जन्मदिन पर बड़े आयोजन का फैसला किया। पद पर होने के कारण खूब व्यवस्थाएं की। आयोजन को भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन जिनके लिए आयोजन किया गया था वह तो आए ही नहीं। नाम मात्र के लोग आए। बड़ी तैयारी धरी की धरी रह गईं। जन्मदिन की बधाई संदेश के पोस्टर लगाने के लिए भी कोई नेता कार्यकर्ता आगे नहीं आया। खुद ही ने ही खुद को बधाई देने वाले पोस्टर लगवा दिए। अब जन आधार मापने का इससे बड़ा रियलिटी टेस्ट हो नहीं सकता। महिला नेता को शायद सब आसानी से समझ आ गया होगा। पार्टी के चाणक्य और चर्चित मंत्री की मुलाकात में क्या हुआ?
पिछले दिनों देश की राजधानी में प्रदेश के एक चर्चित मंत्री ने सत्ताधारी पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले नेता से मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। सुना है चर्चित मंत्री ने कई तरह की शिकायतें की। कई बातें बताईं, जो पहले से ही प्रदेश में सियासी चर्चाओं में रही हैं। हालांकि चाणक्य कहे जाने वाले नेताजी ने भी चर्चित मंत्री को उनके पास उनसे संबंधित आई हुईं शिकायतों का जिक्र किया। मतलब बात जहां थी, वहीं रह गई। कुछ होने वाला नहीं है। मंत्री क्यों नहीं कर पाए इंजीनियर का तबादला
कई सरकारी महकमों में कुछ अफसर ऐसे होते हैं, जिन्हें अपनी जगह से हिलाना मंत्री के भी बस की बात नहीं होती। शहरों को देखने वाली एक एजेंसी के इंजीनियर के तबादले में मंत्री को असलियत का अहसास हुआ। सुना है मंत्री जी ने तबादले करने के लिए लिस्ट भेजी, उसमें एक इंजीनियर का भी नाम था, लेकिन उस लिस्ट को बड़े अफसर ने रोक लिया। अफसर ने मंत्री को साफ साफ कह दिया कि इंजीनियर के बिना काम ठप हो जाएगा। इसलिए तबादला नहीं हो सकता। खूब खींचतान हुई, लेकिन मंत्री इंजीनियर का तबादला नहीं कर सके। शायद मंत्री को भी अहसास हुआ होगा कि असली पावर कहां है? ट्रांसफर लिस्ट की गड़बड़ी का राज
एक पखवाड़ा तबादलों पर बैन क्या हटा, किसकी कितनी चल रही है और किस मंत्री की महकमे में कितनी पकड़ है…पता लग गया। चरैवेति चरैवेति स्लोगन वाले महकमे के कुछ तबादले चर्चा का मुद्दा बन गए। महकमे के मंत्री प्रदेश के उपमुखिया हैं। वे दिल्ली चुनाव प्रचार में गए हुए थे। इसी दौरान तबादला लिस्ट जारी हुई। लिस्ट जारी होने के बाद उपमुखिया के पास फोन पहुंचे तो पता लगा उनकी मंजूरी के बिना ही कई फेरबदल कर दिए गए। पड़ताल की तो पता लगा कि सक्षम स्तर से मंजूरी के बाद ही लिस्ट जारी हुई है। अब इस जवाब के बाद उपमुखिया भी कुछ नहीं कर सके। सुनी-सुनाई में पिछले सप्ताह भी थे कई किस्से, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें चमत्कारी बाबा को गिफ्ट की करोड़ों की कार:बैनर से गायब था प्रदेश के मुखिया रहे नेता का फोटो; नेता-पुत्र को सेवा किए बिना मेवे की चाहत


