महिला एवं बाल विकास परियोजना विभाग का मामला:प्रदेश की इकलौती ऐसी परियोजना जिसका हो रहा है निजी संचालन

डीग जिले के कुम्हेर महिला एवं बाल विकास परियोजना कार्यालय का संचालन पिछले तीन दशकों यानी 1994 से सरकारी कर्मचारियों के बजाय एनजीओ के माध्यम से किया जा रहा है। सबसे दिलचस्प और हैरानी की बात यह है कि पूरे राजस्थान में यह एकमात्र परियोजना है, जिसे निजी व्यक्तियों द्वारा चलाया जा रहा है, जबकि खर्च का पूरा वहन सरकार कर रही है। कार्यालय में आरएस स्तर के सीडीपीओ पद से लेकर अकाउंटेंट, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चपरासी और चारों एलएस पदों तक सभी पर एनजीओ के लोग ही तैनात हैं। नियमों के अनुसार यह कार्यालय सीधे सरकार द्वारा संचालित होना चाहिए और सभी पदों पर सरकारी अधिकारी-कर्मचारी नियुक्त होने चाहिए। ऐसे में जब खर्च सरकार उठा रही है तो विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्त कर सीधे संचालन किया जाना चाहिए। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सरकार अपनी ही परियोजना को चलाने में असमर्थ है, जिसके चलते एनजीओ पर खर्च कर उनसे संचालन कराया जा रहा है। 1994 से चली आ रही इस व्यवस्था सवालों के घेरे में है। “राज्य सरकार और एनजीओ के बीच हुए एमओयू के अनुसार 1994 से कुम्हेर महिला एवं बाल विकास परियोजना का संचालन एनजीओ के माध्यम से किया जा रहा है।” -सीकाराम चोयल, उपनिदेशक, महिला बाल विकास विभाग

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