इस स्थिति के विरोध में यूनियन द्वारा हड़ताल जारी रखते हुए विभिन्न स्थानों पर धरने और प्रदर्शन किए जा रहे हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों का समाधान नहीं करती और हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा नहीं करती, तब तक कोई भी बस सड़क पर नहीं चलाई जाएंगी। संघर्ष को और तेज किया जाएगा और सरकार पर दबाव बढ़ाया जाएगा। यूनियन का यह भी कहना है कि किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को बढ़ावा देना कर्मचारियों के हितों पर सीधा हमला है। सरकार द्वारा किए गए वादों को बार-बार तोड़ना और शांतिपूर्ण संघर्ष को कुचलने की कोशिश करना अस्वीकार्य है।कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकाले, टेंडर को तत्काल रद्द करे और पुलिस दमन की जांच करवाई जाए। भास्कर न्यूज | लुधियाना. 25 नवंबर को किलोमीटर स्कीम के टेंडर खोलने के विरोध में पंजाब रोडवेज, पनबस/पी.आर.टी.सी. कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन की ओर से विरोध के ऐलान के तहत शुक्रवार सुबह बस स्टैंड 8 बजे से बंद कर दिया गया। यूनियन ने गेट रैलियां करने का ऐलान भी किया था। साथ ही, टेंडर खुलने पर पूर्ण हड़ताल करने की घोषणा भी की हुई थी। इसी दौरान एक कर्मचारी, हरपाल सिंह, सुबह लगभग 10 बजे पानी की टंकी पर चढ़ गया। उसे शाम 5 बजे एसोसिएशन के पदाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों ने काफी समझाने-बुझाने के बाद नीचे उतारा। हरपाल सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार बस कर्मचारियों के साथ अन्याय कर रही है और पुलिस द्वारा किए जा रहे अत्याचारों को देखकर वह भावुक हो गए। इसी कारण उन्होंने टंकी पर चढ़ने का निर्णय लिया। यूनियन के प्रधान शमशेर सिंह ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह प्रदर्शन प्रतिदिन जारी रहेगा और बस स्टैंड को बंद रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पंजाब ने 1 जुलाई 2024 को हुई बैठक में एक महीने के भीतर मांगों को हल करने का लिखित भरोसा दिया था, परंतु इस आश्वासन को पूरा करने के बजाय सरकार ने शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे संघर्ष को दबाने के लिए दमनकारी रवैया अपनाया। यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार और पुलिस प्रशासन ने मिलकर जबरन धक्का-शाही की, और कई नेताओं एवं कर्मचारियों को उनके घरों से ही गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों और नेताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया और बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस की ओर से कपड़े फाड़ दिए गए और लाठीचार्ज भी किया गया। यह लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला उल्लंघन और सरकार की तानाशाही का उदाहरण है।


