भास्कर न्यूज | सिकोसा ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगतप्रकाश नड्डा से उनके निवास पर मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने देशभर के 13 लाख से अधिक लाइसेंस प्राप्त केमिस्टों की समस्याएं मंत्री के सामने रखीं। प्रतिनिधिमंडल ने जीएसआर 220 अधिसूचना को हटाने की मांग की। यह अधिसूचना कोविड-19 महामारी के दौरान लागू की गई थी। अब महामारी की कोई संभावना नहीं है, फिर भी कुछ अवैध दवा विक्रेता इस नियम का दुरुपयोग कर रहे हैं। इससे कानून का उल्लंघन हो रहा है और जन स्वास्थ्य को खतरा है। प्रतिनिधियों ने बताया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद कुछ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बिना लाइसेंस के दवाएं बेच रहे हैं। यह पूरी तरह अवैध है और उपभोक्ताओं के लिए असुरक्षित भी। देशभर के 13 लाख पंजीकृत केमिस्ट सभी नियमों का पालन करते हैं। खासकर एनआरएक्स (शेड्यूल एच1) और साइकोट्रॉपिक दवाओं की बिक्री में। इसके बावजूद उन्हें अनावश्यक निरीक्षणों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। असली दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती। मंत्री के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं। पहली, जीएसआर 220 को निरस्त किया जाए या उसमें उचित संशोधन किया जाए। दूसरी, ऑनलाइन दवा बिक्री पर स्पष्ट और पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। तीसरी, नियमों के अनुसार कार्य कर रहे लाइसेंस प्राप्त केमिस्टों को अनावश्यक जांच और उत्पीड़न से राहत दी जाए। चौथी, अवैध दवा विक्रेताओं और गैर-लाइसेंसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के खिलाफ कड़ी और शीघ्र कार्रवाई की जाए। ताकि इस पर रोक लग सके।


