मां का दूध बैंक: रांची-हजारीबाग सदर अस्पताल में जगह ही नहीं मिली, आवंटित राशि सरेंडर, दूसरी बार टेंडर में कोई बिडर नहीं आया

नवजात को तत्काल मां का दूध मिल सके, इसके लिए झारखंड के चार जिलों रांची, बोकारो, दुमका व हजारीबाग सदर अस्पताल में मां का दूध बैंक (ह्यूमन मिल्क बैंक) बनाने की योजना थी। इसके लिए 1.60 करोड़ रुपए भी मंजूर हो गए। लेकिन दो साल बाद भी रांची और हजारीबाग सदर अस्पताल में इसके लिए जमीन नहीं मिली। नतीजा यह हुआ कि आवंटित पैसे सरेंडर हो गए। जनवरी 2023 में दोबारा टेंडर कर मिल्क बैंक स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन टेंडर में एक भी बिडर ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। वहीं दुमका और बोकारो में जगह चिह्नित की गई, लेकिन ​इसके बाद विभाग ने कोई खोज-खबर नहीं ली। यह हालत तब है, जब झारखंड कुपोषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार राज्य में पांच साल से कम उम्र के करीब 39% बच्चे कुपोषित हैं। इनमें से 32.1% बच्चे अपनी उम्र के हिसाब से कम वजन के हैं, 19.3% बच्चों का वजन उनके कद के अनुपात में कम है, और 35.5% बच्चों की लंबाई उनकी उम्र के अनुसार कम है। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि बच्चों को जन्म के दौरान मिलने वाली मां का दूध उचित मात्रा में नही मिल सका। -शेष पेज 9 पर हर नवजात को मां का दूध मिल सके, इसलिए शुरू होनी थी योजना नवजात बच्चों में बीमारी और मृत्यु दर कम करने के लिए स्तनपान सबसे प्रभावी है। यह संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है। लेकिन प्री-टर्म, जन्म के समय वजन कम होने या फिर मां या बच्चे के अस्पताल में भर्ती होने पर बच्चे को मां का दूध नहीं मिल पाता। इसी को देखते हुए यह योजना शुरू की गई थी कि हर हाल में नवजात को मां का दूध मिल सके। विशेषज्ञ बोले- कुपोषण से निपटने में मदद मिलती ह्यूमन मिल्क बैंक नवजात शिशुओं में कुपोषण की समस्या को काफी हद तक कम कर सकता था। इसके माध्यम से उन नवजातों को भी मां का दूध मिल पाता, जिनकी माताएं विभिन्न कारणों से उन्हें स्तनपान नहीं करा पातीं। क्योंकि अक्सर बीमार बच्चों में देखा जाता है कि अधिकांश बच्चे कुपोषित हैं। ऐसे में अगर पर्याप्त मात्रा में शुरुआत से ही मां का दूध मिलता तो इससे बचा जा सकता था। -डॉ. राजेश कुमार, शिशु रोग विशेषज्ञ दान किए दूध से चलनी थी पूरी व्यवस्था: सरकार की सोच थी कि सदर अस्पताल में बनने वाले ह्यूमन मिल्क बैंक में कोई भी महिला अपना दूध दान कर सकती है। इस दूध का प्रसंस्करण कर इसे संग्रह करना था और जरूरतमंद बच्चों को देना था। यानी पूरी व्यवस्था दूध के दान से चलनी थी। अगर यह योजना धरातल पर उतरती तो कई ऐसे नवजातों को समय पर मां का दूध मिल सकता।

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