शहर की जागृति कुशवाह (35) ने जिंदगी और मौत के बीच ऐसी जंग लड़ी, जिसमें हार का मतलब सिर्फ एक नहीं, बल्कि तीन जिंदगियों का अंत हो सकता था। शादी के सात साल बाद गर्भवती हुई जागृति की हालत इतनी गंभीर हो गई कि डॉक्टरों को गर्भ समापन की सलाह देनी पड़ी, लेकिन उसने हार मानने से इनकार कर दिया। किडनी फेलियर, रोजाना डायलिसिस, कार्डियक अरेस्ट और पीलिया जैसी जटिल स्थितियों के बीच आखिरकार उसने एक बेटे और एक बेटी को जन्म दिया। डायलिसिस के दौरान कार्डियक अरेस्ट गर्भावस्था के18वें हफ्ते में ब्लीडिंग होने पर अगस्त में उन्हें विशेष ज्यूपिटर अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां दोनों किडनियों के खराब होने और लिवर इंजरी के साथ मल्टी ऑर्गन फेलियर का पता चला। डॉक्टरों ने रोजाना छह घंटे डायलिसिस शुरू किया। 22वें हफ्ते में बायोप्सी से पता चला कि दोनों किडनियां रिकवर नहीं होंगी। ट्रांसप्लांट संभव नहीं था। 24वें हफ्ते में डायलिसिस के दौरान कार्डियक अरेस्ट हुआ और करीब 7 मिनट तक हार्ट बंद रहा। सीपीआर से सांसें लौटीं और 24 घंटे तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। सोनोग्राफी में दोनों शिशु सुरक्षित पाए गए। 25 अक्टूबर को 30वें हफ्ते में पीलिया होने पर तत्काल सीजर किया गया। बेटे का वजन 835 ग्राम और बेटी का 1130 ग्राम था। पिछले हफ्ते बच्चों को एनआईसीयू से डिस्चर्ज किया गया। असाधारण है यह मामला यह केस इसलिए असाधारण माना जा रहा है क्योंकि डायलिसिस पर चल रही गर्भवती महिला का कार्डियक अरेस्ट होना और सात मिनट तक हार्ट बंद रहने के बावजूद मां और दोनों गर्भस्थ शिशुओं का सुरक्षित रहना बेहद दुर्लभ है। नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सनी मोदी के अनुसार, ऐसी स्थिति में प्रेग्नेंसी को 30वें हफ्ते तक सुरक्षित ले जाना मेडिकल लिटरेचर में पहले दर्ज नहीं है। इसीलिए इसे दुनिया का पहला मामला माना जा रहा है।


