ग्वालियर के बुरे हाल हैं। नगरीय सीमा में दिनों दिन पेयजल, सीवर, सड़क, उड़ती धूल, अतिक्रमण जैसी समस्याएं दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। जनता की सुनवाई तो दूर पार्षदों के सवालों के जवाब निगम परिषद में अधिकारी नहीं दे रहे हैं। इस कारण शुक्रवार को परिषद को स्थगित तक करना पड़ा। शहर के हालात ऐसे हैं कि सड़क कम और गड्ढे ज्यादा दिखने लगे हैं। सीवर सड़कों पर बह रही है। धूल थामने के लिए नई रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदने के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है। पीड़ित जनता और पार्षद बड़े जनप्रतिनिधियों की दहलीज पर दस्तक दे रहे हैं, लेकिन उनकी भी सुनवाई नहीं हो रही है। अब निगम सभापति मनोज सिंह तोमर ने आयुक्त संघ प्रिय को भी 43 पत्र लिखे हैं। ये पत्र 13 जनवरी से लेकर 5 दिसंबर तक लिखें हैं। जिनके जवाब अफसरों से नहीं दिए। वहीं 7 पार्षदों ने निगम परिषद में 13 समस्याओं के जवाब मांगे थे, जिनका जवाब भी अफसरों ने परिषद में नहीं दिया। पत्र में शहर की समस्याएं: लैंडफिल साइट से कचरा कम करने और स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग पार्षदों के पत्र और सवालों की सुनवाई नहीं बैठक में आए नहीं, चिट्ठी पर नहीं की बात शुक्रवार को निगम परिषद में सात पार्षदों ने 13 सवाल के जवाब मांगे। तब निगम आयुक्त संघ प्रिय इस बैठक में शामिल नहीं हुए। कारण बताया गया कि वह छुट्टी पर हैं। इस कारण परिषद में हंगामा हुआ और रद्द हो गई। शनिवार को जब सभापति और पार्षदों की समस्याओं के संबंध में फोन लगाया तो उठाया नहीं। मैसेज भेजा तो जवाब नहीं दिया। पत्रों पर क्या हुआ, इसलिए फिर लिखा पत्र जनता और पार्षद समय-समय पर समस्याओं को बताते हैं। उनका निराकरण हो और जनता को सुविधा मिले। इसके लिए पहले भी पत्र लिखे थे। उन पत्रों पर जब कार्रवाई के जानकारी नहीं मिली तो आयुक्त को पत्र लिखा है। उनके पूछा कि पत्रों पर क्या कार्रवाई की है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। – मनोज सिंह तोमर, सभापति ननि


