बैतूल| मां तापी परिक्रमा यात्रा लगभग 180 किलोमीटर का सफर तय कर गुजरात से महाराष्ट्र में प्रवेश कर चुकी है। परिक्रमा समिति के अध्यक्ष जितेंद्र कपूर ने बताया इस 180 किमी की यात्रा में करीब 80 किमी का क्षेत्र अत्यंत दुर्गम और पहाड़ी का रहा, जहां बसावा जनजाति के लोग निवास करते हैं। इस क्षेत्र के लगभग 20 गांवों में 90% तक आबादी ईसाई बन चुकी है। कई गांवों में तो केवल दो या चार घरों में ही हिंदू परिवारों के बच्चे शेष हैं। परिक्रमा के दौरान गांव लिंगी के विक्रम बसावा ने बताया उकाई से एक संघ की महिला शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ कराने आती हैं, लेकिन चार हजार की आबादी वाले गांव में केवल 20 महिलाएं ही इसमें शामिल हो पाती हैं। अब यह परिक्रमा यात्रा महाराष्ट्र में प्रतिदिन लगभग 25 किमी का सफर तय करते हुए आगे बढ़ रही है और 17 फरवरी को बैतूल पहुंचेगी। क्षेत्र में सनातन प्रेमियों की संख्या कम होने के कारण तापी भगत बड़ी कठिनाई से दूर-दूर से सामग्री लाकर परिक्रमा वासियों की सेवा कर रहे हैं। इस यात्रा में राजेश दीक्षित, काले महाराज, सुभाष कालभोर, सुभाष कासदे सहित लगभग 50 सदस्यों का दल लगातार मां तापी की परिक्रमा कर रहा है।


