मां बगलामुखी में बढ़ी भक्तों की आस्था

मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं देवी हैं। मान्यता है कि मां बगलामुखी की आराधना से शत्रुओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है। मां बगलामुखी में आस्था रखने से भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पहले भक्त हिमाचल प्रदेश स्थित मां बगलामुखी मंदिर में जाकर शत्रु नाश, कोर्ट कचहरी के केस जीतने और पारिवारिक सुख शांति के लिए हवन यज्ञ करवाते थे। वहीं अब भक्तों की आस्था मां बगलामुखी में ज्यादा होने से शहर में मां के मंदिरों की संख्या भी बढ़ गई है। पिछले 5 साल की बात करें तो पहले शहर में एक ही मंदिर था। परंतु जैसे-जैसे भक्तों का आस्था बढ़ी तो तरनतारन रोड, शिवाला बाग भाइयां, मजीठा रोड, वेरका और अब छेहर्टा में भी मां बगलामुखी जी की मूर्ति मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की गई है। जिसमें रोजाना भक्त माता रानी की पूजा करने जाते हैं। श्री बाला जी धाम मंदिर नारायणगढ़ के मुख्य संचालक प्रवेश महाराज का कहना है कि भक्तों में मां बगलामुखी जी की आस्था बढ़ने से कई मंदिरों में मूर्तियों की प्रतिष्ठा हुई है। पंडित कन्हैया लाल शास्त्री का कहना है कि पूजनीय देवी बगलामुखी का स्थान कलयुग में अत्यंत महत्वपूर्ण है। मां बगलामुखी को शक्ति की प्रचंड स्वरूपा देवी माना जाता है, जो शत्रुओं का विनाश, भय का निवारण और विजय की प्राप्ति में सहायक मानी जाती हैं। मां बगलामुखी जयंती के दिन पूजा करने से जीवन के संकटों का निवारण होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। वहीं इलेक्शन दौरान कई नेतागण भी मां बगलामुखी की पूजा और हवन यज्ञ करवाने हिमाचल के मंदिर में जाते रहे हैं। पहले शहर में सिर्फ कुछ भक्त थे। इसलिए झब्बाल रोड में मां बगलामुखी का पहला बना। उसके बाद शिवाला बाग भाइयां की काली माता मंदिर, वेरका माता रानी मंदिर, मजीठा रोड हरिमंदिर और नारायणगढ़ श्री बाला जी धाम मंदिर में भी मां बगलामुखी जी की मूर्ति विराजमान की गई है। शिवाला बाग भाइयां मंदिर में कई लोग हवन यज्ञ करवाने आते हैं। इन जगहों पर मां बगलामुखी के मंदिर है।

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