मां और भाई से बिछड़ कर एक बेबी लेपर्ड स्कूल में फंस गया। स्कूल के पीछे खेल मैदान के चारों तरफ 6 से 8 फीट की दीवार थी। लेपर्ड दीवार फांद नहीं पाया। हो-हल्ला हुआ तो शावक बदहवास हो गया। वह इधर-उधर दौड़ने लगा। उस वक्त स्कूल में तीन कक्षाओं में 50 बच्चे थे। टीचर्स ने सभी को सुरक्षित घर भेजा। इसके बाद टीचर्स और गांव वालों ने लेपर्ड की घेराबंदी कर वन विभाग को सूचना दी। टीम ने 4 घंटे बाद शावक को रेस्क्यू कर लिया। घटना भीलवाड़ा के कोटड़ी थाना क्षेत्र के गौरव का खेड़ा गांव के सरकारी स्कूल में शुक्रवार सुबह 9 बजे हुई। दोपहर 1 बजे के करीब वन विभाग की 5 सदस्यीय टीम ने शावक को रेस्क्यू किया। रेस्क्यू करने के बाद शावक दिखाते वनकर्मी… ऐसे चला घटनाक्रम.. सुबह 9 बजे- भीलवाड़ा के कोटड़ी थाना क्षेत्र में 400 की आबादी वाले गौरव का खेड़ा गांव की सरकारी स्कूल के खेल मैदान के पास से गुजरते हुए दो ग्रामीणों भैरू और एक अन्य ने मादा लेपर्ड और दो शावकों को देखा। उन्होंने स्कूल पहुंचकर टीचर किशन लाल को इसकी जानकारी दी। हो-हल्ला हुआ तो मादा लेपर्ड और एक शावक भाग गए लेकिन दूसरा शावक खेल मैदान की चारदीवारी में फंस गया। स्कूल टीचर किशन लाल ने बताया- ग्रामीण हल्ला मचाते हुए स्कूल में घुसे। कह रहे थे कि स्कूल में लेपर्ड घुस आया है। हमने क्लास रूम के गेट बंद कर लिए। कुछ ही देर में बच्चों के परिजन और ग्रामीण स्कूल में पहुंच गए और अपने बच्चों को लेकर सुरक्षित घर लौट गए। उस वक्त स्कूल में 3 क्लासरूम में लगभग 50 बच्चे थे। सभी बच्चे और स्कूल स्टाफ सुरक्षित रहे। सुबह 10.10 बजे- ग्रामीण भवानी शंकर जाट ने बताया- लेपर्ड स्कूल कैंपस में खेल मैदान में था। यहां काफी कंटीली झाड़ियां और घास हैं। बच्चे घर चले गए तो टीचर्स ने भी लाठियां संभाल ली। मंशा पंचायत के प्रशासक दिनेश बैरवा और राजू शर्मा समेत काफी लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों ने लाठियां लेकर मैदान की घेराबंदी की। शावक मैदान में फंस गया। वह एक घंटे तक इधर-उधर दौड़ता रहा। कुछ लोग मोबाइल कैमरा ऑन कर मैदान में उतरे। वे लगातार शोर मचाकर शावक को दौड़ाते रहे। शावक पत्थर-लकड़ियों और झाड़ियों के बीच दुबक गया। सुबह 11.05 बजे- डीएफओ भीलवाड़ा गौरव गर्ग ने बताया- लेपर्ड की सूचना मिलते ही रेंजर राजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में एसीएफ पायल माथुर और तीन गार्ड सहित पांच सदस्यों की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद रेस्क्यू के प्रयास शुरू किए। लोगों का सहयोग रहा। स्कूल आने वाले रास्ते पर दोनों तरफ लोगों की आवाजाही को रोक दिया। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को दूर कर दिया। दोपहर 1 बजे- टीम ने झाड़ियों में दुबके शावक को सफलता पूर्वक रेस्क्यू कर लिया। शावक को ट्रैंकुलाइज नहीं किया गया है। लगातार भागने के कारण वह बदहवास था। उसे वनकर्मी ने निकालकर गोद में उठा लिया। यह काफी छोटा है। अब इसे वन क्षेत्र जहाजपुर में छोड़ दिया जाएगा। शावक की मदर लेपर्ड को भी ट्रैक करने की कोशिश की जा रही है। DFO बोले- इलाके में सेंचुरी डवलप करने पर विचार डीएफओ भीलवाड़ा गौरव गर्ग ने बताया- इस क्षेत्र में लेपर्ड का मूवमेंट रहता है। इलाके में सेंचुरी डवलप करने पर विचार किया जा रहा है। आमजन को लेपर्ड से घबराने की जरूरत नहीं है। आम तौर पर यह शर्मिला जानवर लोगों पर अटैक नहीं करता। लेपर्ड के मूवमेंट से वाइल्डलाइफ एक्टिविटी को और पर्यटन आधारित रोजगार को बढ़ावा मिलता है। स्थानीय विधायक भी जहाजपुर क्षेत्र में वाइल्डलाइफ सेंचुरी डवलप करने की बात विधानसभा में रख चुके हैं। पंचायत प्रशासक बोले- 6 मवेशियों का शिकार कर चुकी मादा लेपर्ड स्थानीय निवासी भवानी शंकर जाट ने बताया- गौरव का खेड़ा इलाके में बीते 15 दिन से मादा लेपर्ड और 2 शावकों का मूवमेंट है। जावल, देवरिया और गौरव का खेड़ा को मादा लेपर्ड ने अपना इलाका बना लिया है। यहां वह आधा दर्जन मवेशियों का शिकार कर चुकी है। ग्रामीणों में दहशत है। किसान खेत और कुओं पर जाने से भी डरते हैं। लेपर्ड से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… बछड़े का शिकार कर पानी की टंकी में गिरा लेपर्ड:ऊंचाई के कारण बाहर नहीं निकल पाया, ट्रेंकुलाइज कर उदयपुर लाए उदयपुर के वल्लभनगर कस्बे के पास लेपर्ड गाय के बछड़े का शिकार कर पानी की टंकी में गिर गया। लेपर्ड को रेस्क्यू करने उदयपुर से टीम गई है। मामला वल्लभनगर-करणपुर मार्ग पर उदाखेड़ा में मोती कृष्ण गौशाला में आज दोपहर 2 बजे का है। (पढ़ें पूरी खबर)


