माइक्रोसॉफ्ट कर्मचारी बन ठगी मामले में 3 लड़कियों को जेल:10 युवक 2 दिन के पुलिस रिमांड पर; झुंझुनूं के मंडावा में चला रहे थे फर्जी कॉल सेंटर

झुंझुनूं के मंडावा कस्बे में एक होटल में साइबर ठगी के कॉल सेंटर चला रहे गिरफ्तार 13 आरोपियों को मंगलवार को झुंझुनूं में कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने तीनों युवतियों को जेल भेज दिया। वहीं 10 युवकों को पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया। मंडावा थानाधिकारी रामनिवास ने बताया कि रिमांड पर आरोपियों पूछताछ की जाएगी। पुलिस सोमवार को मंडावा एक होटल में कॉल सेंटर चला रहे 13 लोगों गिरफ्तार किया था। यह गिरोह 15 दिन से मंडावा अपनी गतिविधि कर रहा था। पुलिस को गुप्त सूचना मिल गई थी। पुलिस पिछले 10 -12 दिन पीछे लगी हुई थी। सूचना पुख्ता होने के बाद सोमवार को होटल में दबिश देकर साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया था। 15 दिन से होटल में ठहरे हुए थे इस गिरोह द्वारा माइक्रोसॉफ्ट और सोशल मीडिया सहायता के नाम पर लोगों को फंसाकर भारी-भरकम ठगी की जा रही थी। पुलिस जांच में सामने आया कि ये आरोपी मंडावा के एक होटल में पिछले 15 दिनों से ठहरे हुए थे। वहीं से पूरे साइबर ठगी नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। इन्होंने ‘माइक्रो सिप’ नामक एप के माध्यम से माइक्रोसॉफ्ट और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का झांसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाया। आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट का अधिकृत कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताते थे और अपनी लोकेशन अमेरिका के वॉशिंगटन की दिखाते थे। वे पीड़ितों को तकनीकी सहायता देने के बहाने एक विशेष सॉफ्टवेयर डाउनलोड करवाते, जिससे उन्हें पीड़ित के कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस मिल जाता। इसके बाद वे सिस्टम को हैंग कर पीड़ितों की निजी जानकारी जैसे बैंक डिटेल्स, पासवर्ड्स आदि चुरा लेते। मास्टरमाइंड मिकी और फ्रेडी की तलाश जारी पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने गिरोह के दो मास्टरमाइंड मिकी और फ्रेडी के नाम सामने आए हैं। वे भी मंडावा आए थे। लेकिन यहां कुछ दिन रुके और चले गए। ये दोनों पूरे नेटवर्क का संचालन करते हैं। दोनों आरोपी उत्तर प्रदेश के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इन दोनों की तलाश में जुटी है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार करने का दावा कर रही है। अमेरिकी नागरिकों को बनाया निशाना पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का मुख्य निशाना अमेरिकी नागरिक थे। ऐसे लोग जो तकनीकी जानकारी में कमजोर होते हैं या जिन्हें लैपटॉप/कंप्यूटर संचालन में दिक्कत आती है। माइक्रोसॉफ्ट कस्टमर सपोर्ट के नाम पर ये लोग सोशल मीडिया या गूगल के जरिए इस गिरोह से संपर्क करते थे। एक बार संपर्क स्थापित होने के बाद यह गिरोह पीड़ितों को धीरे-धीरे अपने शिकंजे में ले लेता था। हाईटेक तरीके से देते थे धोखा आरोपी जिस एप का इस्तेमाल करते थे, वह तकनीकी रूप से काफी उन्नत था। इससे वे न केवल कंप्यूटर का नियंत्रण हासिल कर लेते थे बल्कि पीड़ित की गतिविधियों पर नजर भी रखते थे। कई मामलों में तो इन्होंने पीड़ितों के सिस्टम में वायरस डालकर उन्हें और अधिक परेशानी में डाल दिया ताकि वे जल्दी से जल्दी “सहायता” के नाम पर पैसे देने को तैयार हो जाएं। होटल से संचालित हो रहा था पूरा नेटवर्क यह गिरोह मंडावा के एक होटल में रहकर अपना ऑपरेशन चला रहा था। होटल से ही सारे कंप्यूटर, फोन कॉल्स और एप के जरिए पीड़ितों से संपर्क किया जाता था। पुलिस ने होटल से कई लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, नकदी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। यह भी जांच की जा रही है कि होटल संचालक को इस नेटवर्क के बारे में जानकारी थी या नहीं। अब तक कितनी ठगी की, होगी जांच पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी कितने समय से इस क्षेत्र में सक्रिय थे और अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बना चुके हैं। साइबर विशेषज्ञों की टीम को भी जांच में शामिल किया गया है ताकि सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज की गहराई से जांच की जा सके और अन्य पीड़ितों तक भी पहुंचा जा सके।

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