छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित इलाकों में सक्रिय माओवादी संगठन सीपीआई (माओवादी) को विस्फोटक सप्लाई करने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की स्पेशल कोर्ट जगदलपुर ने फैसला सुनाया है। अदालत ने तीन आरोपियों को 7-7 साल की सजा सुनाई है। ये तीनों आरोपी छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के रहने वाले हैं और माओवादी कैडरों के लिए ओवरग्राउंड वर्कर (मददगार) के रूप में काम कर रहे थे। कौन हैं आरोपी
कोर्ट ने जिन लोगों को सजा सुनाई है, उन तीन आरोपियों में सेमल दीपक, नारा भास्कर, तेलम मुत्ता हैं। तीनों को 2023 में छत्तीसगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इनके पास से इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर, कोडटेक्स वायर और जिलेटिन की छड़ें बरामद हुई थीं। ये सामग्री माओवादी हमलों में विस्फोट करने के लिए इस्तेमाल होते हैं। क्या था पूरा मामला
पुलिस जांच में सामने आया कि ये आरोपी प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) के कैडरों के लगातार संपर्क में थे और उनके कहने पर जंगलों में जरूरी सामान पहुंचाते थे। इनमें खास तौर पर विस्फोटक सामग्री और रोजमर्रा की चीजें शामिल थीं। आरोप है कि यह नेटवर्क माओवादियों के लिए जरूरी सामान दूर-दराज के गांवों से इकट्ठा कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाता था। कब और कैसे हुई कार्रवाई
फरवरी 2024 में इस मामले की जांच एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौंप दी गई थी। एनआईए की टीम ने कड़ी जांच कर आरोपियों के खिलाफ पुख्ता मौखिक और दस्तावेजी सबूत जुटाए। इसके बाद जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने यूए(पी) अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं के तहत दोषी पाते हुए तीनों आरोपियों को सजा सुनाई। अदालत ने तीनों आरोपियों को 7-7 साल की सश्रम कारावास (Hard Labour) और 500-500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अगर वे जुर्माना नहीं चुकाते हैं, तो उन्हें एक महीने की अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी। एक आरोपी बरी
इस मामले में एक और आरोपी पुट्टी पप्पी रेड्डी भी शामिल था, जिसे पुलिस ने बाद में गिरफ्तार किया था। लेकिन अदालत में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं पाए जाने पर उसे बरी कर दिया गया।


