माता-पिता और गुरु हमारे देवता, इनकी पूजा धूप-दीप से नहीं, सम्मान से होती है

जालंधर | स्त्री आर्य समाज मंदिर मॉडल टाउन में दु:ख निवारक गायत्री यज्ञ श्रद्धापूर्वक किया गया। सर्वप्रथम पंडित सत्य प्रकाश शास्त्री एवं पंडित बुद्धदेव वेद अलंकार ने वैदिक मंत्र उच्चारण के साथ भक्तों से हवन कुंड में आहुतियां डलवाई। इसके बाद सुरिंदर सिंह गुलशन ने ‘देना भगवान देना भक्तों को लाखों खुशियां, इतनी खुशियां देना आंचल न समाय खुशियां’ व अन्य भजन सुनाकर भक्तों को मंत्रमुग्ध किया। आचार्य वेदपाल ने बताया कि माता-पिता, गुरु और अतिथि हमारे चेतन देवता हैं। उनकी असली पूजा केवल धूप-दीप से नहीं, बल्कि सेवा, सम्मान और उनके पास बैठकर उनके ज्ञान को सुनने से होती है। इस दौरान उन्होंने सूर्य और जल जैसे जड़ देवताओं की पूजा के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सूर्य की पूजा का अर्थ केवल जल चढ़ाना नहीं, बल्कि ओजोन परत की रक्षा करना और यज्ञ के माध्यम से वातावरण को शुद्ध रखना है। इसी प्रकार, नदियों में कचरा न फेंककर और जल को प्रदूषण मुक्त रखकर ही हम जल देवता की सच्ची आराधना कर सकते हैं। कार्यक्रम का स्टेज संचालन रजनी सेठी एवं शशि मेहता मिलकर किया। यहां कमलेश सेठी, मधु शर्मा, रजत चतरथ, सुदेश भंडारी, जोगिंदर भंडारी, हिंद पाल सेठी, सुनील सिंह, विभा आर्य, उर्वशी बत्रा व अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।

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