सरकारी स्कूलों में पोषाहार बनाने वाली कुक कम हैल्पर महिला कर्मचारियों ने नागौर शहर के नेहरू पार्क में अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कुक कम हैल्पर संघर्ष समिति के बैनर तले एकजुट हुई इन महिलाओं ने मुख्यमंत्री के नाम 11 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सौंपा। कुक कम हैल्पर महिला कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें मात्र ₹2297 का मानदेय दिया जाता है, जो आज की भीषण महंगाई को देखते हुए बेहद कम है। कर्मचारियों ने अपनी प्रमुख मांग रखते हुए कहा कि इस मानदेय को बढ़ाकर कम से कम ₹10,000 से ₹15,000 किया जाना चाहिए। बकाया मानदेय, पेंशन और स्थायीकरण की प्रमुख मांगें ज्ञापन में कर्मचारियों ने ‘पन्नाधाय बाल गोपाल दुग्ध योजना’ के तहत दूध गर्म करने के लिए दिए जा रहे ₹500 प्रतिमाह के भत्ते को बढ़ाकर ₹1500 करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि पिछले पाँच माह से अधिक समय से बकाया पड़ा उनका मानदेय तुरंत उनके बैंक खातों में जमा कराया जाए। संघर्ष समिति ने कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा की मांग करते हुए राजकीय कर्मचारियों की तर्ज़ पर वृद्धावस्था पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से कार्यरत इन महिला कर्मचारियों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए नियमानुसार स्थायी करने के आदेश दिए जाएं। इसके अलावा, ज्ञापन में सभी का सामूहिक बीमा कराने और महिलाओं को साल में दो बार पोशाक (ड्रेस) उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है। प्रदेश में एक लाख नौ हजार कर्मचारी कार्यरत गौरतलब है कि 15 अगस्त 1995 से पीएम पोषाहार योजना (राष्ट्रीय मिड डे मील योजना) के तहत सरकारी स्कूलों की शाला प्रबंधक समिति और स्कूल प्रबंधक समिति के प्रस्ताव से प्रदेशभर में करीब एक लाख नौ हजार कुक कम हैल्पर लगाए गए हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। कुक कम हेल्पर संघर्ष समिति के संयोजक हरिराम ने बताया कि हम 35 साल से राजकीय सेवा में काम कर रहे हैं और आज भी हमें न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिल रही है। संघर्ष समिति कि अध्यक्ष विमला ताड़ा ने बताया कि हमें मानदेय बहुत कम मिल रहा है जिसे बढ़ाया जाना चाहिए और हमें स्थाई किया जाए।


